श्री खाटू श्यामचालीसा
२० चौपाई · २ दोहे · कलियुग के देवता का स्तवन
बर्बरीक से खाटू श्याम तक की भक्ति यात्रा। श्याम बाबा का यह चालीसा सच्चे मन से पाठ करने वाले को सुख, समृद्धि और मनोकामनापूर्ति का आशीर्वाद देता है।
चालीसा की महिमा
“श्री खाटू श्याम चालीसा” श्याम बाबा का प्राचीन स्तोत्र है — एक दोहा, बीस चौपाइयाँ और एक समापन दोहा। प्रत्येक चौपाई बर्बरीक की उत्पत्ति, श्रीकृष्ण के वरदान और कलियुग में श्याम के रूप में उनकी पूजा का वर्णन करती है।
नियमित पाठ से भक्त के मन में शांति, घर में संपन्नता और जीवन में बाबा की कृपा का संचार होता है। हारे का सहारा — यह चालीसा हर निराशा में आशा का दीपक है।
॥ दोहा ॥
श्री गुरु चरण ध्यान धर,
सुमिर सच्चिदानंद।
श्याम चालीसा भजत हूँ,
रच चौपाई छंद॥
चौपाई · ०१ श्याम-श्याम भजि बारंबारा।
सहज ही हो भवसागर पारा॥
इन सम देव न दूजा कोई।
दीनदयालु न दाता होई॥
चौपाई · ०२ भीम सुपुत्र अहिलावती जाया।
कहीं भीम का पौत्र कहाया॥
यह सब कथा सही कल्पांतर।
तनिक न मानो इसमें अंतर॥
चौपाई · ०३ बर्बरीक विष्णु अवतारा।
भक्तन हेतु मनुज तन धारा॥
वासुदेव देवकी प्यारे।
यशुमति मैया नंद दुलारे॥
चौपाई · ०४ मधुसूदन गोपाल मुरारी।
ब्रजकिशोर गोवर्धन धारी॥
सियाराम श्री हरि गोविंदा।
दीनपाल श्री बालमुकुंदा॥
चौपाई · ०५ दामोदर रण छोड़ बिहारी।
नाथ द्वारिकाधीश खरारी॥
नरहरि रूप प्रह्लाद उबारा।
खम्भ फाड़ हिरणाकुश मारा॥
चौपाई · ०६ राधावल्लभ रुक्मिणी कांता।
गोपी वल्लभ कंस हनंता॥
मनमोहन चित चोर कहाए।
माखन चोरी चोर कर खाए॥
चौपाई · ०७ मुरलीधर यदुपति घनश्यामा।
कृष्ण पतित पावन अभिरामा॥
मायापति लक्ष्मीपति ईशा।
पुरुषोत्तम केशव जगदीशा॥
चौपाई · ०८ विश्वपति जय भुवन पसारा।
दीनबंधु भक्तन रखवारा॥
प्रभु का भेद न कोई पाया।
शेष महेश थके मुनिराया॥
चौपाई · ०९ नारद शारद ऋषि योगिंदर।
श्याम-श्याम सब रटत निरंतर॥
कवि कोटि करी कथा गिनंता।
नाम अपार अथाह अनंता॥
चौपाई · १० हर सृष्टि हर युग में भाई।
ये अवतार भक्त सुखदाई॥
हृदय माहि करि देखु विचारा।
श्याम भजे तो हो निस्तारा॥
चौपाई · ११ कीर पढ़ावत गणिका तारी।
भीलनी की भक्ति बलिहारी॥
सती अहिल्या गौतम नारी।
भई श्रापवश शिला दुलारी॥
चौपाई · १२ श्याम चरण रज चित लगाई।
पहुंची पति लोक में जाई॥
अजामिल अरु सदन कसाई।
नाम प्रताप परम गति पाई॥
चौपाई · १३ जाके श्याम नाम अधारा।
सुख लहहि दुख दूर हो सारा॥
श्याम सलोने हैं अति सुंदर।
मोर मुकुट सिर तन पीतांबर॥
चौपाई · १४ गले बैजंती माल सुहाई।
छवि अनूप भक्तन मन भाई॥
श्याम-श्याम सुमिरहु दिन-राती।
श्याम दुपहरि कर परभाती॥
चौपाई · १५ श्याम सारथी जिस रथ के।
रोड़े दूर होय उस पथ के॥
श्याम भक्त न कहीं पर हारा।
भीर परि तब श्याम पुकारा॥
चौपाई · १६ रसना श्याम नाम रस पी ले।
जी ले श्याम नाम के ही ले॥
संसारी सुख भोग मिलेगा।
अंत श्याम सुख योग मिलेगा॥
चौपाई · १७ श्याम प्रभु हैं तन के काले।
मन के गोरे भोले-भाले॥
श्याम संत भक्तन हितकारी।
रोग-दोष अघ नाशे भारी॥
चौपाई · १८ प्रेम सहित जब नाम पुकारा।
भक्त लगत श्याम को प्यारा॥
खाटू में हैं मथुरावासी।
पारब्रह्म पूर्ण अविनाशी॥
चौपाई · १९ सुधा तान भरि मुरली बजाई।
चहुं दिशि जहां सुनी पाई॥
वृद्ध-बाल जेते नारी नर।
मुग्ध भए सुनि बंशी स्वर॥
चौपाई · २० हड़बड़ कर सब पहुंचे जाई।
खाटू में जहां श्याम कन्हाई॥
जिसने श्याम स्वरूप निहारा।
भव भय से पाया छुटकारा॥
॥ समापन दोहा ॥
श्याम सलोने सांवरे,
बर्बरीक तनुधार।
इच्छा पूर्ण भक्त की,
करो न लाओ बार॥
॥ इति श्री खाटू श्याम चालीसा सम्पूर्णम् ॥
जय श्री श्याम
पाठ की विधि
- ०१
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- ०२
श्याम बाबा के चित्र अथवा प्रतीक के समक्ष दीप व धूप प्रज्वलित करें।
- ०३
मन को एकाग्र कर श्रद्धा से चालीसा का पाठ करें — अधिकतम लाभ के लिए ११, २१ अथवा १०८ बार।
- ०४
पाठ के अंत में बाबा से अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।