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खाटू श्यामEN
पाठ संग्रह

श्री श्याममंत्र

सात मंत्र · बीज, प्रणाम, ध्यान, संकट-मोचन, समर्पण

श्री खाटू श्याम जी के सात प्रमुख मंत्रों का संग्रह — प्रत्येक के साथ रोमन लिप्यंतरण, भावार्थ और जप-वेला का परामर्श। नित्य पाठ से बाबा की कृपा का अविरल संचार।

मंत्र की महिमा

मंत्र शब्दों का वह संक्षिप्त समूह है जो श्रद्धा-पूर्वक उच्चारण करने पर मन को एकाग्र करता है और देवता की कृपा का माध्यम बनता है। श्याम बाबा के मंत्र विशेष रूप से कलियुग में प्रभावी माने जाते हैं — “हारे का सहारा” कहने वाले बाबा के सरल नाम-स्मरण से ही भक्त के संताप दूर होते हैं।

इस पृष्ठ पर दिए गए सात मंत्र विभिन्न अवसरों के लिए हैं — दैनिक जप, ध्यान, संकट-काल, और समर्पण। प्रत्येक मंत्र के साथ उसकी रोमन लिप्यंतरण, हिन्दी भावार्थ और प्रयोग-वेला का परामर्श दिया गया है, जिससे सही मंत्र, सही भाव से पढ़ा जा सके।

॥ श्री श्याम मंत्र-संग्रह ॥
  1. ०१बीज मंत्र

    ॐ श्री श्याम देवाय नमः॥

    भावार्थ

    श्याम बाबा को सादर नमस्कार। बीज मंत्र बाबा का सबसे संक्षिप्त किन्तु अति प्रभावशाली नाम-स्मरण है — जपने वाले के मन में बाबा की छवि का दर्शन कराता है।

    प्रयोग-वेला
    दैनिक जप के लिए। माला फेरते समय, स्नान-ध्यान के समय, अथवा कठिन क्षणों में निरंतर मन में दोहराने हेतु।
    जप संख्या
    १०८ बार · एक माला (नित्य)
  2. ०२प्रणाम मंत्र

    ॐ श्री श्याम देवाय विद्महे,

    बर्बरीकाय धीमहि।

    तन्नो श्यामः प्रचोदयात्॥

    भावार्थ

    हे श्याम देव, हम आपको जानें। हे बर्बरीक, हम आपका ध्यान करें। वे श्याम हमारी बुद्धि को सत्पथ पर प्रेरित करें। यह श्याम की गायत्री-शैली प्रणाम है।

    प्रयोग-वेला
    मंदिर में दर्शन से पूर्व, घर में पूजा का प्रारंभ, अथवा किसी नए कार्य के संकल्प से पहले।
    जप संख्या
    ३, ११ अथवा २१ बार
  3. ०३ध्यान मंत्र

    मोर मुकुटधारी श्याम,

    पीताम्बर तन शोभाधाम।

    वैजन्ती माला गल हार,

    खाटू नरेश को बारम्बार॥

    भावार्थ

    मोर मुकुट धारण करने वाले श्याम, जिनके तन पर पीताम्बर शोभा देता है, गले में वैजन्ती की माला है — खाटू के राजा को बारम्बार प्रणाम। ध्यान के समय बाबा का यह स्वरूप मन में स्थिर किया जाता है।

    प्रयोग-वेला
    ध्यान-आसन में बैठकर, आँखें मूँदकर, बाबा की छवि मन में लाने के लिए।
    जप संख्या
    ११ बार · ध्यान-पूर्वक
  4. ०४शीश-दानी मंत्र

    ॐ नमो शीश के दानी,

    हारे के सहारे।

    श्याम कन्हैया खाटू वाले,

    भक्तन के रखवारे॥

    भावार्थ

    जिन्होंने महाभारत में अपना शीश दान किया, जो हारे हुओं के सहारे हैं — खाटू वाले श्याम कन्हैया, भक्तों के रक्षक — उन्हें मेरा नमस्कार। बाबा के सर्वोच्च त्याग का स्मरण।

    प्रयोग-वेला
    जब किसी कठिन परिस्थिति में बाबा से रक्षा अथवा मार्गदर्शन की प्रार्थना करनी हो।
    जप संख्या
    ११ अथवा २१ बार
  5. ०५हारे का सहारा मंत्र

    हारे के सहारा श्याम,

    बाबा हारे के सहारा।

    जय श्री श्याम जय श्री श्याम,

    खाटू नरेश हमारा॥

    भावार्थ

    हारे हुओं के सहारे हैं श्याम बाबा। जय श्री श्याम। खाटू के राजा हमारे आराध्य हैं। यह बाबा की सबसे प्रिय स्तवन-पंक्ति है — निराशा में आशा का दीपक।

    प्रयोग-वेला
    जीवन की निराशा, हानि, अथवा संकट के समय। निरंतर दोहराने पर मन में शांति का संचार होता है।
    जप संख्या
    अनगिनत · निरंतर
  6. ०६संकट-मोचन मंत्र

    ॐ श्याम बाबा संकट हरो,

    भक्तन का भय दूर करो।

    जय बर्बरीक त्रिबाण-धारी,

    काली-कलयुग के अधिकारी॥

    भावार्थ

    हे श्याम बाबा, संकट हरो। भक्तों का भय दूर करो। तीन बाणों के स्वामी बर्बरीक की जय। कलियुग के अधिष्ठाता की जय। संकट के समय बाबा की तीन-बाण-शक्ति का स्मरण।

    प्रयोग-वेला
    व्यक्तिगत अथवा परिवार पर आए संकट के समय, अथवा यात्रा-आरंभ पर।
    जप संख्या
    २१ अथवा १०८ बार
  7. ०७समर्पण मंत्र

    त्वमेव माता च पिता त्वमेव,

    त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव।

    त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,

    त्वमेव सर्वं मम श्याम देव॥

    भावार्थ

    आप ही माता हैं, आप ही पिता। आप ही बंधु हैं, आप ही सखा। आप ही विद्या हैं, आप ही धन। हे श्याम देव, मेरे लिए सब कुछ आप ही हैं। यह सम्पूर्ण समर्पण का शास्त्रीय श्लोक है।

    प्रयोग-वेला
    पूजा के अंत में, अथवा किसी भी पाठ के समापन पर — स्वयं को बाबा को सौंपते हुए।
    जप संख्या
    १ बार · अंत में

॥ इति श्री श्याम मंत्र-संग्रह सम्पूर्णम् ॥

जय श्री श्याम

जप की विधि

  1. ०१

    स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।

  2. ०२

    तुलसी अथवा रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें — श्याम-भक्त गेंदा-काष्ठ की माला भी रखते हैं।

  3. ०३

    मन को एकाग्र कर अपने अभीष्ट मंत्र का चयन करें। प्रत्येक मंत्र के नीचे “जप संख्या” का परामर्श दिया गया है।

  4. ०४

    जप के अंत में समर्पण मंत्र (अंतिम) का एक बार पाठ अवश्य करें — यह सम्पूर्ण फल का संकल्प है।