श्री श्यामप्रार्थना
बारह पंक्ति · चौखट पर समर्पण · हृदय की पुकार
“श्याम तेरी चौखट पर आया हूँ” — खाटू नरेश के समक्ष भक्त के मन की सीधी पुकार। बारह पंक्तियों में अहंकार-त्याग, दीनता और समर्पण का सरल सरस पाठ।
प्रार्थना की महिमा
प्रार्थना भक्त के हृदय की वह सीधी पुकार है जो किसी विधि-विधान, किसी छंद-शास्त्र की मोहताज नहीं। चालीसा का पाठ शास्त्र-सम्मत है, स्तुति का गान महिमा-सम्मत — किन्तु प्रार्थना केवल बाबा और भक्त के बीच का संवाद है। श्याम बाबा की चौखट पर पहुँचकर जो सबसे पहले निकलती है, वह यही प्रार्थना है।
इस बारह-पंक्ति की प्रार्थना में भक्त अपने अहंकार को बाबा के चरणों में रखता है, अपनी छोटाई स्वीकार करता है, और श्याम-नाम की डोर थामकर उनकी शरण में अंत-काल तक बने रहने का संकल्प करता है। हारे के सहारे श्याम — यही इस प्रार्थना का सार है।
पंक्ति · ०१ श्याम तेरी चौखट पर आया हूँ,
सब कुछ छोड़कर तेरे द्वार पर लाया हूँ।
पंक्ति · ०२ अहंकार मेरा तू ही मिटा दे,
दीन-हीन को अपनी शरण बना दे।
पंक्ति · ०३ तेरी कृपा का कोई पार नहीं,
भक्तों पर तेरी ममता बेशुमार सही।
पंक्ति · ०४ मैं तो हूँ छोटा सा एक भिखारी,
तू है खाटू नरेश संसार-तारी।
पंक्ति · ०५ संकट के क्षण में बस तू ही याद आता,
हारे का सहारा कोई और नहीं भाता।
पंक्ति · ०६ श्याम नाम की डोर मेरे हाथ रहे,
अंत समय तक तेरा साथ रहे॥
॥ इति श्री श्याम प्रार्थना सम्पूर्णम् ॥
जय श्री श्याम
प्रार्थना की विधि
- ०१
स्नान करके, स्वच्छ वस्त्र धारण कर, बाबा के चित्र अथवा प्रतीक के समक्ष शांत मन से बैठें।
- ०२
हाथ जोड़कर, आँखें मूँदकर, धीरे-धीरे पंक्ति-दर-पंक्ति प्रार्थना का मनन करें — गाने की आवश्यकता नहीं, मन में दोहराना ही पर्याप्त।
- ०३
प्रत्येक पंक्ति को कहते समय उसका भाव हृदय में उतारें — अहंकार, दीनता, कृपा, समर्पण।
- ०४
पाठ के अंत में अपनी निजी मनोकामना अथवा संताप बाबा के चरणों में निवेदित करें। यह क्षण सबसे पवित्र है।
