श्री श्यामप्रार्थना
हाथ जोड़ विनती · खाटू नगर की महिमा · फाल्गुन मेला · जयकारा
“हाथ जोड़ विनती करूं, सुणियों चित्त लगाय” — हाथ जोड़कर बाबा श्याम के चरणों में की गई विनती। खाटू धाम की महिमा, फाल्गुन शुक्ला के मेले और भक्त की पुकार से सजी यह प्रार्थना ‘जय श्री श्याम’ के जयकारे पर पूर्ण होती है।
श्री श्याम प्रार्थना · आरम्भ
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दास आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज ‖
प्रार्थना की महिमा
प्रार्थना भक्त के हृदय की वह सीधी पुकार है जो किसी विधि-विधान की मोहताज नहीं — हाथ जोड़कर, चित्त लगाकर बाबा के दरबार में अपनी लाज सौंप देना ही इसका भाव है। चालीसा का पाठ शास्त्र-सम्मत है, स्तुति का गान महिमा-सम्मत — किन्तु यह राजस्थानी बोली में रची श्री श्याम प्रार्थना उसी सरल समर्पण की वाणी है।
इन पाँच पदों में भक्त ढूंढाड़ (राजस्थान) की धन्य धरती और खाटू नगर के धाम की महिमा गाता है, श्याम-नाम को अपना जीवन-प्राण कहता है, फाल्गुन शुक्ला के मेले का स्मरण करता है, और अंत में ‘जय श्री श्याम — लीलो घोड़ो लाल लगाम’ के जयकारे से प्रार्थना पूर्ण करता है।
गहरे पाठ के लिए श्री खाटू श्याम चालीसा का नित्य पाठ अनुशंसित है — २० चौपाई और दो दोहों का यह स्तोत्र प्रार्थना का स्वाभाविक विस्तार है।
पद · ०१ हाथ जोड़ विनती करूं सुणियों चित्त लगाय,
दास आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज,
धन्य ढूंढारो देश हैं खाटू नगर सुजान,
अनुपम छवि श्री श्याम की, दर्शन से कल्याण।
पद · ०२ श्याम श्याम तो मैं रटूं श्याम है जीवन प्राण,
श्याम भक्त जग में बड़े उनको करूँ प्रणाम,
खाटू नगर के बीच में बण्यों आपको धाम,
फाल्गुन शुक्ला मेला भरे जय जय बाबा श्याम।
पद · ०३ फाल्गुन शुक्ला द्वादशी उत्सव भारी होए,
बाबा के दरबार से खाली जाये न कोय,
उमा पति लक्ष्मी पति सीता पति श्री राम,
लज्जा सब की रखियो खाटू के बाबा श्याम।
पद · ०४ पान सुपारी इलायची इत्तर सुगंध भरपूर,
सब भक्तों की विनती दर्शन देवो हुजूर,
आलू सिंह तो प्रेम से धरे श्याम को ध्यान,
श्याम भक्त पावे सदा श्याम कृपा से मान।
पद · ०५ जय श्री श्याम बोलो जय श्री श्याम,
खाटू वाले बाबा जय श्री श्याम,
लीलो घोड़ो लाल लगाम,
जिस पर बैठ्यो बाबो श्याम॥
॥ इति श्री श्याम प्रार्थना सम्पूर्णम् ॥
जय श्री श्याम
प्रार्थना सुनें — हाथ जोड़ विनती करूं
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प्रार्थना का भाव — विनती से जयकारे तक
भक्ति-शास्त्र में प्रार्थना को नवधा भक्ति का मूल कहा गया है — वह क्षण जब भक्त हाथ जोड़कर, सब तर्क छोड़कर केवल देवता के सम्मुख खड़ा हो जाता है। ‘हाथ जोड़ विनती करूं, सुणियों चित्त लगाय’ इसी विनम्र पुकार की सीधी, सरल वाणी है।
इस प्रार्थना में भक्त पहले बाबा से अपनी लाज रखने की विनती करता है, फिर खाटू नगर और ढूंढाड़ देश की महिमा गाता है — ‘धन्य ढूंढारो देश हैं, खाटू नगर सुजान’। आगे फाल्गुन शुक्ला द्वादशी के मेले का वर्णन है, जहाँ बाबा के दरबार से कोई खाली नहीं लौटता।
अंत में पान-सुपारी, इलायची और इत्र की सुगंध के साथ भक्त दर्शन की विनती करता है, और प्रार्थना ‘जय श्री श्याम — लीलो घोड़ो लाल लगाम, जिस पर बैठ्यो बाबो श्याम’ के जयकारे पर पूर्ण होती है। चालीसा शास्त्र-सम्मत विस्तृत स्तवन है, स्तुति महिमा का गान — किन्तु यह प्रार्थना खाटू की माटी से उपजी सरल, सरस पुकार है।
प्रार्थना की विधि
- ०१
स्नान करके, स्वच्छ वस्त्र धारण कर, बाबा के चित्र अथवा प्रतीक के समक्ष शांत मन से बैठें।
- ०२
हाथ जोड़कर, आँखें मूँदकर, धीरे-धीरे पद-दर-पद प्रार्थना का मनन करें — चाहें तो ‘जय श्री श्याम’ के जयकारे के साथ गाएँ, अथवा मन में दोहराएँ।
- ०३
प्रत्येक पद को कहते समय उसका भाव हृदय में उतारें — हाथ जोड़ विनती, खाटू धाम की महिमा, और जय श्री श्याम का जयकारा।
- ०४
पाठ के अंत में अपनी निजी मनोकामना अथवा संताप बाबा के चरणों में निवेदित करें। यह क्षण सबसे पवित्र है।
श्याम प्रार्थना — सामान्य प्रश्न
- ०१
श्याम प्रार्थना और चालीसा में क्या अंतर है?
चालीसा चालीस पंक्तियों का शास्त्र-सम्मत विस्तृत स्तवन है जो बाबा की कथा कहता है; यह प्रार्थना हाथ जोड़कर की गई संक्षिप्त, सरस पुकार है जिसमें खाटू धाम की महिमा और फाल्गुन मेले का स्मरण है। चालीसा बाबा की कथा कहती है, प्रार्थना भक्त की विनती।
- ०२
क्या यह प्रार्थना किसी भी समय कर सकते हैं?
हाँ। प्रार्थना के लिए कोई निश्चित वेला अथवा विधि अनिवार्य नहीं — संकट के क्षण में, यात्रा-मार्ग पर, अथवा नित्य संध्या-दीप के समय, जब भी हृदय पुकारे, यह प्रार्थना की जा सकती है।
- ०३
इस प्रार्थना का मूल भाव क्या है?
हाथ जोड़कर बाबा से अपनी लाज रखने की विनती, खाटू धाम और फाल्गुन मेले की महिमा, और ‘जय श्री श्याम’ का जयकारा — यही इसका सार है। भक्त दर्शन-मात्र से कल्याण की कामना करता है।
- ०४
क्या प्रार्थना को गाना आवश्यक है?
नहीं। हाथ जोड़कर, आँखें मूँदकर, मन में पंक्ति-दर-पंक्ति मनन करना ही पर्याप्त है। गाने की नहीं, भाव में डूबने की आवश्यकता है।
