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खाटू श्यामEN
पाठ संग्रह

श्री श्यामचौरासी नाम

८४ नाम · प्रत्येक एक गुण-दर्शन · सम्पूर्ण नाम-स्मरण

श्री खाटू श्याम जी के चौरासी नामों का संग्रह — प्रत्येक नाम बाबा के एक गुण, एक रूप, एक लीला अथवा एक वंशगत पहचान का परिचय। निरंतर पाठ से बाबा की समग्र महिमा हृदय में स्थापित होती है।

चौरासी नाम की महिमा

“चौरासी” अर्थात ८४ — यह संख्या सनातन परंपरा में पूर्णता का प्रतीक है। ८४ लाख योनियों के चक्र से उद्धार पाने का संकल्प इसी संख्या से जुड़ा है। श्री श्याम बाबा के चौरासी नामों का स्मरण भक्त को इस चक्र से मुक्त करने का सरस मार्ग है।

इन ८४ नामों में बाबा के समस्त रूप समाहित हैं — महाभारत के बर्बरीक से लेकर खाटू नरेश तक, तीन-बाण-धारी वीर से लेकर हारे के सहारा तक, श्रीकृष्ण के अंशावतार से लेकर कलियुग के अधिनायक तक। प्रत्येक नाम के साथ संक्षिप्त भावार्थ दिया गया है, जिससे भक्त नाम के पीछे का अर्थ भी जान सके।

॥ श्री श्याम चौरासी ॥

क्रमबद्ध प्रस्तुति — रूप, वंशावली, बाण, लीला, श्रृंगार, भक्तवत्सलता, परमतत्त्व और खाटू।

  1. ०१

    श्री श्याम

    परम प्रिय आराध्य देव

  2. ०२

    श्यामसुंदर

    श्याम वर्ण के अति सुंदर रूप

  3. ०३

    घनश्याम

    मेघ-वर्ण के मनोहर देव

  4. ०४

    खाटूनरेश

    खाटू धाम के अधिपति

  5. ०५

    श्यामल

    श्याम-कांति वाले देव

  6. ०६

    श्यामदेव

    समस्त देवों में श्याम-स्वरूप

  7. ०७

    बाबा श्याम

    भक्तों के स्नेहिल बाबा

  8. ०८

    श्याम कन्हैया

    श्याम और कन्हैया का संयुक्त रूप

  9. ०९

    बर्बरीक

    महाभारत के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर

  10. १०

    भीम-पौत्र

    पाण्डव भीमसेन के पौत्र

  11. ११

    घटोत्कच-नंदन

    घटोत्कच और मौर्वी के सुपुत्र

  12. १२

    अहिलावती-तनय

    अहिलावती (मौर्वी) के तनय

  13. १३

    मौर्वी-नंदन

    मौर्वी माता के स्नेह-पात्र

  14. १४

    यदु-वंशी

    यदुकुल की परंपरा से जुड़े

  15. १५

    पाण्डव-वंशज

    पाण्डव वंश की तीसरी पीढ़ी

  16. १६

    क्षत्रिय-शिरोमणि

    क्षत्रिय-कुल के शिरोमणि

  17. १७

    त्रिबाणधारी

    तीन अमोघ बाणों के स्वामी

  18. १८

    तीन-बाण-स्वामी

    तीन बाणों से सम्पूर्ण विजय

  19. १९

    अमोघ-बाण

    जिनका हर बाण कभी व्यर्थ नहीं

  20. २०

    शीश-दानी

    अपना शीश दान कर देने वाले

  21. २१

    सिर-दानवीर

    सर्वोच्च त्याग के प्रतीक

  22. २२

    महान-त्यागी

    महान त्याग के मूर्त रूप

  23. २३

    कृष्ण-वरदप्राप्त

    श्रीकृष्ण से वर प्राप्त शिष्य

  24. २४

    कलियुग-अवतार

    कलियुग में पूज्य अवतार

  25. २५

    विष्णु-अवतार

    भगवान विष्णु के अंशावतार

  26. २६

    मधुसूदन

    मधु दैत्य के संहारक

  27. २७

    मुरलीधर

    बांसुरी धारण करने वाले

  28. २८

    गोपाल

    गायों के पालनहार

  29. २९

    कन्हैया

    सबको प्रिय कृष्ण-रूप

  30. ३०

    वासुदेव

    वसुदेव के पुत्र

  31. ३१

    देवकी-नंदन

    देवकी माता के सुपुत्र

  32. ३२

    नंद-दुलारे

    नंद बाबा के लाडले

  33. ३३

    यशोदा-लाला

    यशोदा माता के लाल

  34. ३४

    ब्रजराज

    ब्रज मण्डल के राजा

  35. ३५

    द्वारिकाधीश

    द्वारिका नगरी के अधिपति

  36. ३६

    गोवर्धन-धारी

    गोवर्धन पर्वत उठाने वाले

  37. ३७

    मोर-मुकुटधारी

    मोर-पंख का मुकुट धारण करने वाले

  38. ३८

    पीताम्बरधारी

    पीले वस्त्र धारण करने वाले

  39. ३९

    वैजयंतीमाली

    वैजन्ती माला धारण करने वाले

  40. ४०

    कुंडल-धारी

    कानों में कुंडल पहनने वाले

  41. ४१

    कौस्तुभ-धारी

    कौस्तुभ मणि धारण करने वाले

  42. ४२

    चंदन-तिलकधारी

    मस्तक पर चंदन-तिलक लगाने वाले

  43. ४३

    कलंगी-धर

    सिर पर कलंगी धारण करने वाले

  44. ४४

    श्री-सिंहासनधारी

    रत्न-जड़ित सिंहासन पर विराजमान

  45. ४५

    चंवर-छत्रधारी

    चँवर और छत्र से सेवित देव

  46. ४६

    शंखधारी

    पवित्र शंख धारण करने वाले

  47. ४७

    चक्रधारी

    सुदर्शन चक्र के धारक

  48. ४८

    गदाधारी

    कौमोदकी गदा के स्वामी

  49. ४९

    हारे का सहारा

    पराजितों के संरक्षक

  50. ५०

    दीनबंधु

    दीन-दुखियों के सच्चे बंधु

  51. ५१

    करुणानिधान

    करुणा के अथाह सागर

  52. ५२

    भक्तवत्सल

    भक्तों पर वात्सल्य रखने वाले

  53. ५३

    भक्त-रक्षक

    भक्तों की निरंतर रक्षा करने वाले

  54. ५४

    सेवक-उद्धारक

    सेवकों का उद्धार करने वाले

  55. ५५

    शरणागत-वत्सल

    शरण आए को न त्यागने वाले

  56. ५६

    मनोकामना-पूरक

    मन की कामनाएँ पूर्ण करने वाले

  57. ५७

    वरदायक

    भक्तों को वर देने वाले

  58. ५८

    कृपा-निधान

    कृपा के अनंत निधान

  59. ५९

    दु:ख-हर्ता

    सब दुखों का हरण करने वाले

  60. ६०

    भव-तारक

    भव-सागर से पार उतारने वाले

  61. ६१

    परमात्मा

    सर्वश्रेष्ठ आत्मा-स्वरूप

  62. ६२

    परब्रह्म

    सर्वोच्च सत्य-स्वरूप

  63. ६३

    सर्वव्यापी

    सर्वत्र विद्यमान देव

  64. ६४

    सर्वज्ञ

    सब कुछ जानने वाले

  65. ६५

    सर्वशक्तिमान

    समस्त शक्तियों के स्वामी

  66. ६६

    अंतर्यामी

    अंतर्मन में निवास करने वाले

  67. ६७

    ज्ञान-स्वरूप

    ज्ञान के साक्षात स्वरूप

  68. ६८

    आनंद-कन्द

    आनंद के मूल स्रोत

  69. ६९

    सत्य-स्वरूप

    सत्य के साक्षात रूप

  70. ७०

    निरंजन

    निर्मल, निष्कलंक प्रभु

  71. ७१

    अजन्मा

    जन्म-रहित, अनादि

  72. ७२

    अविनाशी

    कभी न नष्ट होने वाले

  73. ७३

    खाटू-शिरोमणि

    खाटू धाम के शिरोमणि

  74. ७४

    सीकर-वासी

    सीकर (खाटू) में निवास करने वाले

  75. ७५

    राजस्थान-गौरव

    राजस्थान भूमि के गौरव

  76. ७६

    फाल्गुन-प्रिय

    फाल्गुन मेले के प्रिय आराध्य

  77. ७७

    एकादशी-वल्लभ

    एकादशी तिथि के प्रिय

  78. ७८

    लखी-मेला-नायक

    लाखों भक्तों के मेले के नायक

  79. ७९

    निशान-प्रिय

    श्याम-निशान (झंडे) से पूज्य

  80. ८०

    पदयात्रा-स्वामी

    रींगस से पैदल यात्रा के आराध्य

  81. ८१

    चूरमा-प्रिय

    चूरमा प्रसाद के अति प्रिय

  82. ८२

    पेड़ा-वल्लभ

    पेड़ा प्रसाद से प्रिय

  83. ८३

    खाटू-धाम-पति

    खाटू धाम के एकमेव स्वामी

  84. ८४

    जय श्री श्याम

    समस्त भक्तों की पुकार और मंगल-वचन

॥ इति श्री श्याम चौरासी सम्पूर्णम् ॥

जय श्री श्याम

पाठ की विधि

  1. ०१

    स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। बाबा के चित्र अथवा प्रतीक के समक्ष शांत मन से बैठें।

  2. ०२

    क्रमशः १ से ८४ तक प्रत्येक नाम का उच्चारण करें। प्रत्येक नाम के पूर्व “ॐ” अथवा “जय” जोड़ सकते हैं — “ॐ श्री श्याम नमः”।

  3. ०३

    नाम-स्मरण के साथ नाम का भावार्थ भी मन में दोहराएँ। इससे प्रत्येक नाम का संस्कार हृदय में स्थिर होगा।

  4. ०४

    एक माला (१०८ बार) अथवा साप्ताहिक एक पाठ का संकल्प विशेष फलदायी है। पाठ के अंत में “जय श्री श्याम” के उच्चारण से समर्पण करें।