श्री खाटू श्यामआरती
ॐ जय श्री श्याम हरे · पाँच पद · दैनिक आरती
खाटू धाम में दिन-रात पाँच आरतियों के समय गाई जाने वाली पवित्र आरती। श्याम बाबा के सिंहासन, श्रृंगार, भोग और भक्तों की पुकार का स्तवन।
आरती की महिमा
“ॐ जय श्री श्याम हरे” श्री खाटू श्याम जी की वह आरती है जो प्रतिदिन पाँच बार — मंगला, श्रृंगार, भोग, संध्या और शयन — मंदिर में गाई जाती है। प्रत्येक पद में बाबा के एक रूप का दर्शन है: सिंहासन, श्रृंगार, माला, भोग, और भक्तों की मधुर पुकार।
ध्रुवपद “ॐ जय श्री श्याम हरे” प्रत्येक पद के बीच दोहराया जाता है — यही आरती की मूल लय है। श्रद्धा से गाने पर बाबा की कृपा, मन की शांति, और सब विघ्नों का नाश होता है।
आरती के बाद के पाठ-क्रम में नित्य श्री खाटू श्याम चालीसा का पाठ करें — आरती मधुर लय की है, चालीसा बाबा की सम्पूर्ण कथा का।
॥ ध्रुवपद ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥
पद · ०१ रत्न जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुले।
तन केसरिया बागा, कुंडल श्रवण पड़े॥
॥ ॐ जय श्री श्याम हरे ॥
पद · ०२ गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले॥
॥ ॐ जय श्री श्याम हरे ॥
पद · ०३ मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरें।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करें॥
॥ ॐ जय श्री श्याम हरे ॥
पद · ०४ झांझ कटोरा और घड़ियाल, शंख मृदंग धरे।
भक्त आरती गावे, जय जयकार करें॥
॥ ॐ जय श्री श्याम हरे ॥
पद · ०५ जो ध्यावे फल पावे, सब दुख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम श्याम उचरें॥
॥ ध्रुवपद ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥
॥ इति श्री खाटू श्याम आरती सम्पूर्णम् ॥
जय श्री श्याम
पाँच आरती दर्शन का महत्त्व
आरती दीप-ज्योति के साथ देवता की वंदना का वह क्षण है जब मन्दिर, पुजारी और भक्त एक स्वर में बाबा की महिमा गाते हैं। खाटू धाम में यह वंदना दिन-भर में पाँच बार होती है — मंगला, श्रृंगार, भोग, संध्या और शयन — और प्रत्येक आरती बाबा के दिन के एक अलग भाव से जुड़ी है।
मंगला आरती प्रातः बाबा को जगाने की वंदना है, श्रृंगार आरती उनके भव्य शृंगार-दर्शन की, भोग आरती प्रसाद-अर्पण की, संध्या आरती दिन-भर की कृपा के आभार की, और शयन आरती बाबा को विश्राम कराने की। इन पाँच वेलाओं में पूरा दिन बाबा की सेवा में पिरो दिया जाता है।
‘ॐ जय श्री श्याम हरे’ का ध्रुवपद प्रत्येक पद के बीच दोहराया जाता है — यही आरती की मूल लय है, जो भक्त को गाते-गाते बाबा के सिंहासन, श्रृंगार, माला और भोग का दर्शन कराती है।
जो भक्त खाटू नहीं पहुँच पाते, वे घर पर ही आरती के समय इसे गाकर मन्दिर की उसी वंदना से जुड़ सकते हैं। आरती के समय की पूरी सूची लाइव दर्शन पृष्ठ पर ऋतु-अनुसार दी गई है।
आरती गाने की विधि
- ०१
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में दीपक अथवा थाली लें।
- ०२
मंगला, श्रृंगार, भोग, संध्या या शयन — किसी भी आरती समय पर गाएँ। समय की पूरी सूची लाइव दर्शन पृष्ठ पर देखें।
- ०३
ध्रुवपद “ॐ जय श्री श्याम हरे” से आरंभ करें। प्रत्येक पद के बाद ध्रुवपद को दोहराएँ।
- ०४
अंत में पुनः ध्रुवपद गाकर बाबा के समक्ष आरती उतारें और प्रसाद ग्रहण करें।
श्याम आरती — सामान्य प्रश्न
- ०१
खाटू श्याम मन्दिर में दिन में कितनी आरती होती हैं?
पाँच — मंगला (प्रातः), श्रृंगार, भोग (मध्याह्न), संध्या और शयन (रात्रि)। आरती के सटीक समय ऋतु के अनुसार बदलते हैं; पूरी सूची लाइव दर्शन पृष्ठ पर देखें।
- ०२
श्याम बाबा की आरती के बोल क्या हैं?
आरती का ध्रुवपद ‘ॐ जय श्री श्याम हरे’ है, जिसके बीच पाँच पद गाए जाते हैं — बाबा के सिंहासन, श्रृंगार, माला, भोग और भक्तों की पुकार का वर्णन। पूरा पाठ इसी पृष्ठ पर दिया गया है।
- ०३
क्या घर पर आरती गा सकते हैं?
हाँ। हाथ में दीप अथवा थाली लेकर, बाबा के चित्र के समक्ष ध्रुवपद से आरम्भ कर आरती गाई जा सकती है। मन्दिर की आरती-वेला पर घर से जुड़ना विशेष भावपूर्ण माना जाता है।
- ०४
आरती और चालीसा में क्या अंतर है?
आरती दीप के साथ गाई जाने वाली संक्षिप्त वंदना है जो मन्दिर में नित्य पाँच बार होती है; चालीसा चालीस पंक्तियों का विस्तृत पाठ है जो बाबा की कथा कहता है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
