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खाटू श्याम
उत्सव · लक्खी मेला

फाल्गुन मेला२०२७

‖ १५–२१ मार्च २०२७ · मुख्य तिथि १८ मार्च · खाटू, सीकर ‖

फाल्गुन शुक्ल एकादशी (आमलकी) — गुरुवार १८ मार्च २०२७ — श्री खाटू श्याम जी का सबसे बड़ा वार्षिक मेला। लाखों भक्त रींगस से खाटू तक १८ किलोमीटर पैदल निशान यात्रा कर के बाबा के दर्शन करते हैं।

  • मुख्य तिथि१८ मार्चफाल्गुन शुक्ल एकादशी (आमलकी) · गुरुवार
  • पैदल यात्रा१८ किमीरींगस से खाटू तक नंगे पाँव निशान यात्रा
  • श्रद्धालु५० लाख+अनुमानित — १५-२१ मार्च के मेले में
महत्व

फाल्गुन एकादशी क्यों विशेष?

शास्त्रीय परम्परा के अनुसार फाल्गुन शुक्ल एकादशी को श्याम बाबा का "प्रागट्य तिथि" माना जाता है — यही वह दिन था जब खाटू ग्राम में राजा रूपसिंह को स्वप्न-दर्शन हुए और बाबा के शीश के प्रागट्य का संकेत मिला।

इसी कारण फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी और द्वादशी — दोनों तिथियाँ बाबा के भक्तों के लिए सर्वोपरि हैं। प्रति वर्ष इन्हीं तिथियों पर लाखों भक्त खाटू पधारते हैं और सम्पूर्ण क्षेत्र भक्ति-रंग में डूब जाता है।

मेला सामान्यतः एकादशी से एक-दो दिन पहले आरम्भ हो जाता है और होली के साथ समाप्त होता है। इस अवधि में खाटू-रींगस मार्ग, सम्पूर्ण ग्राम, और मन्दिर का प्रांगण — सभी निरन्तर भक्ति-कीर्तन से गूँजते रहते हैं।

मेला कैलेंडर

तिथि-वार कार्यक्रम

  1. १५ मार्च २०२७

    सोमवार

    फाल्गुन शुक्ल षष्ठी

    मेले का आरम्भ — रींगस-खाटू मार्ग पर भक्तों का आगमन शुरू, सेवा-शिविर और मन्दिर तैयारियाँ अंतिम चरण में।

  2. १६–१७ मार्च २०२७

    मंगलवार-बुधवार

    सप्तमी से नवमी

    पूर्व-दिवस — निशान यात्रा अपने चरम पर। प्रतिदिन हजारों भक्त रींगस से खाटू पैदल चलते हैं। दर्शन-कतार लम्बी।

  3. १८ मार्च २०२७

    गुरुवार

    फाल्गुन शुक्ल एकादशी (आमलकी)

    मुख्य पर्व-दिवस — बाबा का प्रागट्य पर्व, भीड़ चरम पर, ५६ भोग और मध्यरात्रि अभिषेक। पूरा खाटू भक्ति-रंग में।

  4. १९ मार्च २०२७

    शुक्रवार

    फाल्गुन शुक्ल द्वादशी

    द्वादशी — बाबा के दर्शन की दूसरी विशेष तिथि। एकादशी जितनी ही महत्वपूर्ण। रात्रि-जागरण।

  5. २० मार्च २०२७

    शनिवार

    फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी

    दर्शन, भण्डारा, भजन-संध्या और निरन्तर निशान अर्पण। भीड़ धीरे-धीरे कम होती जाती है।

  6. २१ मार्च २०२७

    रविवार

    फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा (होलिका दहन)

    मेले का समापन — होलिका दहन की संध्या। अगले दिन (२२ मार्च) धूलण्डी / रंगवाली होली।

परम्परा

निशान यात्रा — रींगस से खाटू

केसरिया ध्वज लेकर १८ किलोमीटर पैदल यात्रा — मेले की सबसे विशेष परम्परा।

  1. चरण · ०१

    रींगस से आरम्भ

    निशान यात्रा का पारम्परिक आरम्भ रींगस रेलवे स्टेशन के निकट श्याम कुण्ड से होता है। भक्तगण यहाँ स्नान करके केसरिया निशान (ध्वज) उठाते हैं और खाटू की ओर पैदल चलते हैं।

  2. चरण · ०२

    १८ किलोमीटर पैदल मार्ग

    रींगस से खाटू तक का सम्पूर्ण मार्ग — १८ किलोमीटर — पैदल नंगे पाँव चलकर तय करने की परम्परा है। यह मार्ग समर्पण, साधना और श्रद्धा का प्रतीक है।

  3. चरण · ०३

    मार्ग में सेवा-शिविर

    मार्ग में स्थान-स्थान पर अन्न-क्षेत्र, जल-वितरण, चाय और विश्राम के निःशुल्क सेवा-शिविर लगते हैं। मारवाड़ी समाज और स्थानीय भक्तगण निरन्तर सेवा करते हैं।

  4. चरण · ०४

    खाटू में निशान अर्पण

    खाटू पहुँचकर भक्त मन्दिर के निकट निशान चढ़ावा-स्थल पर अपने ध्वज अर्पित करते हैं। मेले के दौरान लाखों निशान एक साथ अर्पित होते हैं — एक अद्भुत दृश्य।

यात्रा सूचना

मेले में जाने से पहले जानिए

  1. ०१

    अग्रिम बुकिंग अनिवार्य

    मेले के समय खाटू, रींगस, सीकर सभी स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था दो-तीन महीने पहले ही पूरी हो जाती है। होटल, धर्मशाला और आवास की बुकिंग दिसम्बर २०२६ तक अवश्य कर लें।

  2. ०२

    अल्प सामान, मूल आवश्यकताएँ

    भीड़ के कारण भारी सामान असुविधाजनक होता है। केवल पीने का पानी, हल्का नाश्ता, मास्क, सेनेटाइज़र, टॉर्च, और प्राथमिक चिकित्सा के साथ चलें। मन्दिर में मोबाइल/बैग बाहर रखना पड़ता है।

  3. ०३

    भीड़-नियन्त्रण और दर्शन-समय

    मन्दिर समिति मेले में दर्शन के लिए बैरिकेडिंग और कतार-व्यवस्था करती है। दर्शन में कई घण्टे लग सकते हैं। प्रातः ४-५ बजे का समय अपेक्षाकृत कम भीड़ का होता है।

  4. ०४

    वरिष्ठ नागरिक और बच्चों का ध्यान

    अत्यधिक भीड़ में वरिष्ठ नागरिकों, छोटे बच्चों, हृदय-रोगियों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी की आवश्यकता है। अलग दर्शन-कतार और सहायता उपलब्ध है — मन्दिर समिति से सम्पर्क करें।

  5. ०५

    अधिकृत स्रोतों पर ही दान

    मेले में अनेक संस्थाएँ दान-अपील करती हैं। कृपया केवल "श्री श्याम मन्दिर समिति" के अधिकृत दान-पात्र या उनकी वेबसाइट shrishyammandir.com पर ही दान करें। अनधिकृत व्यक्तियों से सावधान रहें।

  6. ०६

    पैदल यात्रा की तैयारी

    रींगस से खाटू १८ किलोमीटर पैदल यात्रा के लिए आरामदायक चप्पल/पैरताण, ढीले सूती कपड़े, और पर्याप्त जल आवश्यक है। यात्रा प्रायः रात्रि या प्रातः आरम्भ करें — दोपहर का तेज ताप टालें।

‖ श्याम बाबा की जय ‖

मेले में आधिकारिक जानकारी, VIP दर्शन, और अद्यतन कार्यक्रम के लिए अधिकृत श्री श्याम मन्दिर समिति की वेबसाइट देखें।