श्री खाटू श्यामकथा
तीन पर्व · बर्बरीक से खाटू नरेश तक की भक्ति यात्रा
महाभारत के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बर्बरीक का जन्म, श्रीकृष्ण द्वारा उनकी परीक्षा व शीश का दान, और कलियुग में खाटू ग्राम में उनका पुनर्प्रकट्य — तीन पर्वों में सम्पूर्ण कथा।
- पर्व · ०१
महाभारत के बर्बरीक
भीम के पौत्र, घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक — माँ अहिलावती से कुलधर्म पाकर, घोर तप से तीन अमोघ बाण प्राप्त कर महाभारत की ओर निकलते हैं।
- पर्व · ०२
श्रीकृष्ण की परीक्षा
श्रीकृष्ण ब्राह्मण रूप में बर्बरीक के सामने आते हैं, उनकी शक्ति की परीक्षा लेते हैं, और सर्वोच्च त्याग के रूप में शीश-दान माँगते हैं। बदले में देते हैं कलियुग का वरदान।
- पर्व · ०३
खाटू में प्रकट्य
कलियुग में खाटू ग्राम की भूमि में दबे शीश का प्रकट्य — गाय के दूध से, ब्राह्मण की खुदाई से, राजा रूपसिंह चौहान के दिव्य स्वप्न से। १०२७ ईस्वी में मंदिर की स्थापना।
पाठ-विधान
तीनों पर्व क्रम से पढ़ें — बर्बरीक का जन्म, श्रीकृष्ण की परीक्षा, और खाटू में प्रकट्य। यह सम्पूर्ण कथा एक पवित्र अर्ध-घंटा का पाठ है, जो श्याम बाबा की महिमा के समस्त आयामों का दर्शन कराती है।
