श्यामजन्मोत्सव
‖ देवउठनी एकादशी · २० नवम्बर २०२६ (शुक्रवार) ‖
खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव (जन्मदिन) हर वर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी — देवउठनी एकादशी — पर धूमधाम से मनाया जाता है। श्याम-भक्त परम्परा में यही बाबा का प्रागट्य (अवतरण) दिवस माना जाता है।
बहुत-से भक्त पूछते हैं — "खाटू श्याम बाबा का जन्मदिन कब है?" उत्तर है: कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी, यानी देवउठनी एकादशी। यह श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से भिन्न, बाबा का अपना जन्मोत्सव है।
देवउठनी एकादशी ही बाबा का जन्मोत्सव क्यों?
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देवउठनी एकादशी — बाबा का प्रागट्य-दिवस
श्याम-भक्त परम्परा में कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) को श्री खाटू श्याम जी का प्रागट्य (अवतरण) दिवस माना जाता है। इसी कारण इस पावन तिथि को बाबा का जन्मोत्सव — जन्मदिन — के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।
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बर्बरीक से "श्याम" — श्रीकृष्ण का वरदान
खाटू श्याम बाबा वस्तुतः बर्बरीक हैं — भीम के पौत्र। महाभारत-काल में शीश-दान के उनके अद्वितीय बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे स्वयं कृष्ण के "श्याम" नाम से पूजे जाएँगे और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करेंगे। खाटू में उन्हीं के प्रागट्य का यह पर्व जन्मोत्सव कहलाता है।
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कार्तिक महोत्सव और मेला
बाबा का यह जन्मोत्सव कार्तिक मेले (कार्तिक महोत्सव) का शिखर-दिवस है। देवउठनी एकादशी के आसपास खाटू में दो-दिवसीय मेला लगता है, देश भर से भक्त निशान लेकर पहुँचते हैं, और "हारे का सहारा" के दरबार में जन्मोत्सव की धूम रहती है।
कैसे मनाया जाता है जन्मोत्सव
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इत्र-स्नान और फूलों का शृंगार
जन्मोत्सव पर बाबा की प्रतिमा को इत्र से स्नान कराकर गुलाब, चम्पा, चमेली और अनेक पुष्पों से भव्य शृंगार किया जाता है — मन्दिर सुगन्ध और रंगों से भर उठता है।
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मावे का केक और छप्पन भोग
बाबा को उनका प्रिय मावे का केक अर्पित किया जाता है और छप्पन भोग लगाया जाता है। भक्त "जन्मदिन मुबारक हो, श्याम बाबा" के भाव से केक अर्पण कर उत्सव मनाते हैं।
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निशान यात्रा और जयकारे
देश भर से भक्त रंग-बिरंगे निशान (ध्वजा) हाथ में लिए बाबा के दरबार पहुँचते हैं और "श्याम बाबा की जय", "खाटू नरेश की जय", "शीश के दानी की जय" के जयकारों से खाटू नगरी गूँज उठती है।
जन्मोत्सव और जन्माष्टमी अलग हैं। जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) श्रीकृष्ण के जन्म का पर्व है, जो खाटू मन्दिर में भी मनाया जाता है — पर बाबा श्याम का अपना जन्मोत्सव देवउठनी एकादशी पर आता है।
‖ शीश के दानी की जय ‖
जन्मदिन मुबारक हो, श्याम बाबा — हारे का सहारा।
श्याम जन्मोत्सव — सामान्य प्रश्न
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खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव (जन्मदिन) कब है?
खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी — देवउठनी एकादशी — के दिन मनाया जाता है। अगली तिथि इस पृष्ठ के सबसे ऊपर दी गई है।
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बाबा का जन्मदिन देवउठनी एकादशी को ही क्यों मनाया जाता है?
श्याम-भक्त परम्परा में कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) को श्री खाटू श्याम जी का प्रागट्य (अवतरण) दिवस माना जाता है। इसीलिए इसी तिथि को बाबा का जन्मोत्सव (जन्मदिन) मनाया जाता है और खाटू में विशेष उत्सव एवं मेला लगता है।
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क्या खाटू श्याम जन्मोत्सव और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एक ही हैं?
नहीं, ये दो अलग पर्व हैं। जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) श्रीकृष्ण के जन्म का पर्व है, जो खाटू मन्दिर में भी मनाया जाता है। परन्तु खाटू श्याम बाबा का अपना जन्मोत्सव देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) पर मनाया जाता है।
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खाटू श्याम जन्मोत्सव पर मन्दिर में क्या होता है?
बाबा को इत्र से स्नान कराकर फूलों से शृंगार किया जाता है, मावे का केक व छप्पन भोग अर्पित होता है, और देश भर से भक्त निशान लेकर जयकारों के साथ दर्शन को पहुँचते हैं। देवउठनी एकादशी के आसपास दो-दिवसीय कार्तिक मेला भी लगता है।
