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खाटू श्याम
उत्सव · जन्माष्टमी

कृष्णजन्माष्टमी

‖ भाद्रपद कृष्ण अष्टमी · ४ सितम्बर २०२६ ‖

श्रीकृष्ण और खाटू श्याम — एक ही चेतना के दो रूप। जन्माष्टमी पर खाटू मन्दिर में मध्यरात्रि अभिषेक, झूला, छप्पन भोग और सम्पूर्ण रात्रि भजन-कीर्तन का अद्भुत वातावरण।

जन्माष्टमी श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व है, और श्याम-भक्तों के लिए यह बाबा का जन्मोत्सव भी है। दोनों एक ही दिव्य चेतना के दो रूप हैं — एक द्वापर का, एक कलियुग का।

महत्व

खाटू में जन्माष्टमी क्यों विशेष?

  1. ०१

    श्याम और श्रीकृष्ण — एक ही चेतना

    श्रीकृष्ण ने महाभारत के समय बर्बरीक को वर दिया था कि कलियुग में वे "श्याम" नाम से, श्रीकृष्ण के ही रूप में पूजे जाएँगे। इस वचन के कारण श्रीकृष्ण और खाटू श्याम — दोनों एक ही चेतना के दो रूप हैं।

  2. ०२

    जन्माष्टमी — बाबा का जन्मदिन भी

    श्याम-भक्त परम्परा में जन्माष्टमी श्रीकृष्ण के साथ-साथ श्याम बाबा का भी जन्मोत्सव माना जाता है। इसी आधार पर खाटू मन्दिर में जन्माष्टमी पर अद्वितीय धूम-धाम होती है।

  3. ०३

    भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

    जन्माष्टमी की तिथि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी है। २०२६ में यह ४ सितम्बर को, और २०२७ में ३० अगस्त को आ रही है। तिथि-निर्धारण के लिए स्थानीय पंचांग का परामर्श लें।

मन्दिर का कार्यक्रम

जन्माष्टमी पर दिनचर्या

  1. चरण · ०१

    मंगल आरती और सजावट

    अष्टमी प्रातः मंगला आरती के साथ ही उत्सव का आरम्भ होता है। मन्दिर सम्पूर्ण रूप से पुष्पों, मोरपंख और रंगीन वस्त्रों से सजाया जाता है। बाबा की प्रतिमा के समक्ष विशेष श्रृंगार होता है।

  2. चरण · ०२

    दिवस भर भजन-कीर्तन

    सम्पूर्ण दिन कीर्तन-मण्डलियाँ श्रीकृष्ण की लीलाओं के भजन गाती हैं। "श्री श्याम बाबा" और "मुरली मनोहर" से सम्बन्धित रचनाएँ विशेष रूप से प्रस्तुत की जाती हैं।

  3. चरण · ०३

    झूला उत्सव

    मन्दिर के प्रांगण में एक सुन्दर सजा हुआ झूला (हिंडोला) रखा जाता है, जिसमें श्रीकृष्ण का बाल-स्वरूप विराजमान किया जाता है। भक्तगण बारी-बारी से झूला झुलाने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

  4. चरण · ०४

    मध्यरात्रि अभिषेक और जन्म-आरती

    रात्रि के १२:०० बजे श्रीकृष्ण के जन्म का क्षण आता है। मन्दिर शंखध्वनि और घण्टा-नाद से गूँज उठता है। बाबा की प्रतिमा का दूध, दही, घृत, मधु और शर्करा से पंचामृत अभिषेक होता है।

  5. चरण · ०५

    विशेष भोग और प्रसाद वितरण

    जन्म के पश्चात ५६ भोग (छप्पन भोग) समर्पित किए जाते हैं — माखन-मिश्री, पेड़ा, खीर, पञ्जीरी और श्रीकृष्ण के प्रिय व्यञ्जन। प्रसाद का वितरण रात्रि भर चलता है।

  6. चरण · ०६

    दूसरे दिन — नन्द-उत्सव

    जन्माष्टमी के अगले दिन "नन्द-उत्सव" मनाया जाता है — गोकुल में श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की पुनर्स्मृति। दही-हाण्डी, खुशी और गीत — सम्पूर्ण भक्ति-वातावरण।

‖ नन्दलाला, श्याम बाबा ‖

जन्माष्टमी की रात्रि में बाबा के साथ श्रीकृष्ण का स्मरण — दोनों एक हैं।

जन्माष्टमी — सामान्य प्रश्न

  1. ०१

    जन्माष्टमी २०२६ में कब है?

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। वर्ष २०२६ में यह ४ सितम्बर को और २०२७ में ३० अगस्त को पड़ रही है। चूँकि यह चन्द्र-तिथि पर आधारित है, सटीक व्रत-तिथि के लिए स्थानीय पंचांग का परामर्श अवश्य लें।

  2. ०२

    खाटू श्याम मन्दिर में जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?

    श्रीकृष्ण ने महाभारत-काल में बर्बरीक को वरदान दिया था कि कलियुग में वे "श्याम" नाम से, स्वयं श्रीकृष्ण के रूप में पूजे जाएँगे। इसी कारण श्याम-भक्त परम्परा में श्रीकृष्ण और खाटू श्याम को एक ही चेतना के दो रूप माना जाता है, और जन्माष्टमी बाबा का भी जन्मोत्सव मानी जाती है।

  3. ०३

    मन्दिर में मध्यरात्रि आरती कब होती है?

    श्रीकृष्ण के जन्म का क्षण रात्रि १२:०० बजे माना जाता है। उस समय मन्दिर शंखध्वनि और घण्टा-नाद से गूँज उठता है, और बाबा की प्रतिमा का दूध, दही, घृत, मधु एवं शर्करा से पंचामृत अभिषेक किया जाता है। यह जन्म-आरती उत्सव का सर्वाधिक भाव-भरा क्षण होता है।

  4. ०४

    जन्माष्टमी पर कौन-कौन-से आयोजन होते हैं?

    दिन का आरम्भ मंगला आरती और विशेष श्रृंगार से होता है, फिर दिनभर भजन-कीर्तन और झूला (हिंडोला) उत्सव चलता है। मध्यरात्रि अभिषेक एवं जन्म-आरती के पश्चात छप्पन भोग अर्पित किए जाते हैं और रातभर प्रसाद वितरण होता है। अगले दिन नन्द-उत्सव मनाया जाता है।

  5. ०५

    क्या जन्माष्टमी के दर्शन घर बैठे देखे जा सकते हैं?

    हाँ। जो भक्त खाटू नहीं पहुँच सकते, वे मन्दिर के लाइव दर्शन के माध्यम से मध्यरात्रि आरती और उत्सव का भाव-लाभ घर बैठे ले सकते हैं। दिनभर के कार्यक्रम और आरती का सीधा प्रसारण उपलब्ध रहता है।