जन्म व वंशावली
महाभारत काल में पाण्डवों के मध्यम भ्राता भीमसेन की एक विशेष संतान हुई — घटोत्कच, जो हिडिम्बा से उत्पन्न महान वीर थे। घटोत्कच का विवाह नाग-कन्या मौर्वी से हुआ, जिन्हें कुछ ग्रंथों में अहिलावती के नाम से भी जाना जाता है। उनके पुत्र हुए — बर्बरीक।
बालक बर्बरीक का स्वरूप अद्भुत था — तेजस्वी, बलवान, और बाल्यकाल से ही धनुर्विद्या की ओर प्रबल रुचि रखने वाला। जब वे अपनी माता मौर्वी की गोद में बैठते, तो माता को आभास होता कि यह बालक साधारण नहीं, अपितु किसी विशेष प्रयोजन के लिए जन्मा है।
तीन पीढ़ियों की वीरता बर्बरीक में संचित थी — पाण्डवों का धर्म, भीम का बल, घटोत्कच की राक्षस-शक्ति, और मौर्वी की नाग-तेज। यही चार धाराएँ मिलकर एक ऐसा वीर बनीं जिसकी क्षमता का पूर्ण दर्शन समस्त सृष्टि के लिए चकित कर देने वाला था।
