युद्ध के बाद का शीश
महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ। पाण्डवों की विजय और धर्म की स्थापना के साथ, बर्बरीक के दान-शीश ने अपना उद्देश्य पूर्ण किया — सम्पूर्ण युद्ध की वह साक्षी रहा। श्रीकृष्ण के निर्देशानुसार, उस पवित्र शीश को रूपवती नदी के तट पर एक स्थान में निहित कर दिया गया।
यह स्थान बाद में राजस्थान के सीकर जिले का खाटू ग्राम कहलाया। शीश भूमि में लीन रहा — सदियों तक, युगों तक — जब तक कलियुग का वह विशेष क्षण नहीं आया जब उसे पुनः प्रकट होना था।
