कार्तिक मेला२०२६
‖ १८–२० नवम्बर २०२६ · खाटू श्याम जन्मोत्सव ‖
कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) — श्री खाटू श्याम जी का प्रागट्य-दिवस। चातुर्मास के समापन और बाबा के जन्मोत्सव का दोहरा संगम। फाल्गुन मेले के बाद वर्ष का दूसरा बड़ा मेला।
- मुख्य तिथि२० नवम्बरकार्तिक शुक्ल एकादशी · शुक्रवार
- पर्व अवधि३ दिननवमी से एकादशी तक
- विशेषता५६ भोगबाबा को विशेष भोग-अर्पण
देवउठनी एकादशी क्यों विशेष?
- ०१
देवउठनी एकादशी = श्याम बाबा का जन्मदिवस
पारम्परिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) श्री खाटू श्याम जी का प्रागट्य-दिवस है। इसी दिन भगवान विष्णु चतुर्मास की योगनिद्रा से जागते हैं — और उसी क्षण कलियुग के "हारे का सहारा" बाबा श्याम का अवतरण भी पूर्ण होता है।
- ०२
चातुर्मास का समापन — सर्वाधिक शुभ दिन
आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी) से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चार माह का "चातुर्मास" काल माना जाता है, जिसमें विवाह आदि शुभ कार्य वर्जित होते हैं। देवउठनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास समाप्त होता है — और सम्पूर्ण समाज पुनः शुभ कार्यों की ओर अग्रसर होता है।
- ०३
फाल्गुन मेला से तुलना
खाटू श्याम वर्ष में दो बड़े मेले होते हैं — फाल्गुन मेला (मार्च) और कार्तिक मेला (नवम्बर)। फाल्गुन मेला बाबा के "खाटू-प्रागट्य" का स्मरण है, जब रूपसिंह चौहान को स्वप्न-दर्शन हुए। कार्तिक मेला बाबा के मूल "जन्म-प्रागट्य" का उत्सव है। दोनों ही पर्व लाखों भक्तों को खाटू ले आते हैं।
तीन दिवसीय कार्यक्रम
१८ नवम्बर २०२६
बुधवार
कार्तिक शुक्ल नवमी (अक्षय नवमी)
मेले का आरम्भ — आँवला नवमी की पूजा, मन्दिर परिसर का विशेष श्रृंगार, भक्तों के आगमन की तैयारी।
१९ नवम्बर २०२६
गुरुवार
कार्तिक शुक्ल दशमी
पूर्व-दिवस — रींगस से खाटू निशान यात्रा अपने चरम पर। रात्रि जागरण, भजन-संध्या, और अगले दिन की मुख्य आरती की तैयारी।
२० नवम्बर २०२६
शुक्रवार
कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी)
मुख्य पर्व-दिवस — श्री खाटू श्याम जी का प्रागट्य उत्सव। चारों ओर लाखों भक्त, ५६ भोग का अर्पण, मध्यरात्रि अभिषेक, और सम्पूर्ण रात्रि कीर्तन।
कार्तिक मेले से पहले जानिए
- ०१
मौसम — गुलाबी सर्दी की शुरुआत
नवम्बर मध्य का खाटू सुहावना होता है — दिन में २०–२५°C, रात्रि में १०–१५°C। हल्के ऊनी कपड़े साथ रखें। फाल्गुन मेले की तुलना में मौसम अधिक सुखद।
- ०२
बुकिंग — दीपावली के बाद ही शुरू
दीपावली (८ नवम्बर) के तुरन्त बाद कार्तिक मेले की बुकिंग शुरू हो जाती है। १० दिन की पहले से बुकिंग पर्याप्त है — फाल्गुन मेले जितनी अग्रिम-योजना नहीं चाहिए।
- ०३
मुख्य दिन भीड़-प्रबन्धन
२० नवम्बर (एकादशी) को भीड़ चरम पर। दर्शन में ४–६ घण्टे लग सकते हैं। प्रातः ४ बजे का समय अपेक्षाकृत कम भीड़ का। वरिष्ठ नागरिकों को अलग कतार उपलब्ध।
- ०४
५६ भोग का दर्शन
मुख्य एकादशी पर बाबा को ५६ प्रकार के भोग अर्पित होते हैं — माखन-मिश्री, पेड़ा, खीर, पञ्जीरी, दही, गुलाब-जामुन, बेसन-लड्डू, और पारम्परिक मारवाड़ी मिठाइयाँ। यह दृश्य अद्वितीय है।
- ०५
दीपावली से कार्तिक मेला — जुड़ी यात्रा
अनेक भक्त दीपावली (८ नवम्बर) के बाद वृन्दावन, मथुरा या जयपुर के यात्रा-कार्यक्रम के साथ खाटू कार्तिक मेला जोड़ देते हैं। यह दो-तीन तीर्थ-स्थलों की एक यात्रा बन जाती है।
- ०६
अधिकृत स्रोत पर ही दान
मेले में अनधिकृत व्यक्तियों के दान-अनुरोध से सावधान। केवल "श्री श्याम मन्दिर समिति" के अधिकृत दान-पात्र या उनकी वेबसाइट shrishyammandir.com पर ही दान करें।
‖ श्याम बाबा की जय ‖
अधिकृत मेला-समय, VIP दर्शन और दान के लिए श्री श्याम मन्दिर समिति की वेबसाइट देखें।
