मुख्य सामग्री पर जाएँ
खाटू श्यामEN
भजन

तेरी बंसीपुकारे राधा नाम

‖ श्री खाटू श्याम भजन ‖

श्रीकृष्ण की मुरली से हर ध्वनि राधा का नाम पुकारती है — और वही श्रीकृष्ण कलियुग के खाटू श्याम हैं। अनुप जलोटा के शास्त्रीय गायन में यह भजन समस्त कृष्ण-श्याम भक्ति का सार है।

यह भजन भारतीय भक्ति-संगीत का एक कालजयी रत्न है। मूल रचना कृष्ण-राधा प्रेम-भक्ति की है, पर श्याम-भक्तों के लिए इसका विशेष अर्थ है — क्योंकि बाबा खाटू श्याम कृष्ण के ही कलियुगी रूप हैं।

अनुप जलोटा का शास्त्रीय गायन इस भजन को अद्वितीय गहराई देता है। उनकी ठहरी हुई आवाज़ और सूक्ष्म मूर्च्छनाएँ श्रोता को राधा-कृष्ण के नित्य-लीला भाव में डुबा देती हैं।

श्रवण

भजन सुनें

यह यूट्यूब का एक प्रसिद्ध संस्करण है। बहुत से कलाकारों ने इस भजन को आवाज़ दी है।

तेरी बंसी पुकारे

ध्रुव पंक्ति

श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम।

लोग करें माखन चोरी का बदनाम॥

मेरा तू है मेरा तू है मेरा तू है।

मेरा माखन चोर मेरा गोपाल॥

  1. अंतरा · ०१

    मोरपंख तेरे शीश सजाये।

    मुरली तेरी मन को भाये॥

    राधा रानी बेसुध हो जाये।

    जब-जब तू मुरली बजाये॥

  2. अंतरा · ०२

    द्वारिकाधीश तू, खाटू नरेश तू।

    हर रूप में बस श्याम तू ही तू॥

    भक्तों का प्यारा, हारे का सहारा।

    श्याम बाबा का नाम है न्यारा॥

पारम्परिक लोक-भजन। विभिन्न संस्करणों में पाठ-भेद हो सकता है।

अर्थ

भजन का मर्म

भजन की प्रथम पंक्ति बहुत मार्मिक है — "तेरी बंसी पुकारे राधा नाम।" अर्थात कृष्ण की मुरली से निकलने वाली हर ध्वनि राधा का ही नाम है। यह प्रेम-भक्ति की चरम अनुभूति है।

अगली पंक्ति में लोक-धारणा का विरोध है — "लोग कहें माखन चोरी का बदनाम।" लोग कृष्ण को माखन-चोर कहते हैं, पर भक्त के लिए वह "मेरा" है — मेरा माखन चोर, मेरा गोपाल।

अन्तिम भाव में बाबा के अनेक नाम जुड़ते हैं — द्वारिकाधीश, खाटू नरेश, हारे का सहारा। ये सब एक ही हैं, जो भक्ति की धारा में अलग-अलग रूप ले लेते हैं।

गायन-अवसर

घरेलू सत्संग, मन्दिर भजन-संध्या, श्रावण मास, जन्माष्टमी — मधुर भाव वाले अवसर।

प्रसिद्ध गायक

अनुप जलोटा का शास्त्रीय गायन। रवीन्द्र जैन की मूल रचना के विभिन्न गायकों ने अपने संस्करण दिए हैं।