यह भजन एक कथा-भजन है — पारम्परिक "बर्बरीक से खाटू श्याम बनने" की पवित्र यात्रा का गीत-रूप। महाभारत के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर का शीश-दान, श्रीकृष्ण का वर, और कलियुग में खाटू में पुनर्प्रकट्य — सभी पर्व इस भजन की पंक्तियों में बँधे हैं।
लखबीर सिंह लक्खा ने इस भजन को अपनी अद्भुत गायकी से अमर कर दिया है। उनका यह संस्करण मेले, जागरण, और सत्संगों में सर्वाधिक प्रिय है।
भजन सुनें
यह यूट्यूब का एक प्रसिद्ध संस्करण है। बहुत से कलाकारों ने इस भजन को आवाज़ दी है।
ध्रुव पंक्ति
बने बर्बरीक खाटू श्याम कैसे,
सुनो भक्तजनों कथा यह कैसे॥
महाभारत में शीश दिया था,
कलियुग में बाबा प्रकट हुआ है॥
अंतरा · ०१
भीम का पौत्र, घटोत्कच का लाला।
अहिलावती का पुत्र निराला॥
तीन बाण की शक्ति पाकर।
बना धनुर्धर सबसे न्यारा॥
अंतरा · ०२
श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण रूप धरा।
दान में शीश माँग लिया प्यारा॥
हँसते-हँसते दे दिया शीश।
पाया वर — कलियुग का ईश॥
पारम्परिक लोक-भजन। विभिन्न संस्करणों में पाठ-भेद हो सकता है।
भजन का मर्म
भजन की प्रथम पंक्ति एक प्रश्न है — "बर्बरीक खाटू श्याम कैसे बने?" यह पूछना ही सम्पूर्ण भक्ति-कथा का द्वार खोल देता है।
पदों में बाबा की कथा क्रम-बद्ध आती है — पारिवारिक पृष्ठभूमि (भीम का पौत्र), तीन बाण का वर, श्रीकृष्ण द्वारा परीक्षा, और शीश-दान। यह भजन एक "गाने वाली कथा" है — भक्तों को महाभारत से कलियुग की यात्रा का स्मरण कराता है।
लखबीर सिंह लक्खा का गायन इस भजन में विशेष शक्ति भरता है — उनकी मधुर पर शक्तिशाली आवाज़ बाबा की वीरता और भक्ति-वत्सलता दोनों को एक साथ ले आती है।
गायन-अवसर
जागरण, सत्संग, मेला यात्रा — विशेषतः वहाँ जहाँ नये भक्तों को बाबा की कथा का परिचय देना हो।
प्रसिद्ध गायक
लखबीर सिंह लक्खा का प्रसिद्ध गायन (Bhaktidwar Television, 2018)। अनेक कलाकारों ने इस कथा-भजन के अपने संस्करण दिए हैं।
- सेठों का सेठ
मारवाड़ी समाज के परम आराध्य — "सेठों का सेठ खाटू नरेश।" बाबा का दानशील स्वरूप जिसने सेठ कोठारी से लेकर लाखों श्रद्धालुओं की झोली भरी।
- तेरी बंसी पुकारे
कृष्ण-श्याम एक हैं — मुरली से हर ध्वनि "राधा" का नाम है। अनुप जलोटा के मधुर शास्त्रीय स्वरों में सजी कालजयी रचना।
- आया फागुण आया
फाल्गुन का स्वागत — मेले, होली, और खाटू दर्शन का उमंगी आगमन। लखबीर सिंह लक्खा का होली-स्पेशल गायन।
- गजब मेरे खाटू वाले
खाटू वाले बाबा के अद्भुत ठाठ — उनके दरबार की महिमा, उनकी कृपा का प्रवाह। कन्हैया मित्तल का सर्वाधिक प्रिय अधिकारिक भजन।
