फाल्गुन माह श्याम-भक्तों के लिए वर्ष का सबसे विशेष समय है। इसी माह की शुक्ल एकादशी को बाबा का प्रागट्य उत्सव है, और इसी माह में लक्खी मेला, फिर होली — सब क्रम से आते हैं।
यह भजन फाल्गुन के आगमन का स्वागत है — एक उमंग-भरा गीत जो मेले की तैयारियों, यात्रा की योजनाओं, और होली के रंगों को एक साथ बाँधता है। लखबीर सिंह लक्खा की प्रसिद्ध T-Series प्रस्तुति इसे और भी जीवन्त बनाती है।
भजन सुनें
यह यूट्यूब का एक प्रसिद्ध संस्करण है। बहुत से कलाकारों ने इस भजन को आवाज़ दी है।
ध्रुव पंक्ति
आया फागुण आया रे,
खाटू वाले का मेला आया रे॥
रंगों की बहार लेके,
श्याम बाबा बुलावा आया रे॥
अंतरा · ०१
चलो रींगस से खाटू, निशान उठाओ।
पैदल यात्रा कर के, बाबा से मिलवा आओ॥
फागुण की हवा में, भक्ति का संदेश।
खाटू वाले बुलाते, चलो श्याम के देश॥
अंतरा · ०२
गुलाल और फूलों से, होली खेलें मिलकर।
बाबा के दरबार में, झूमें सब जुड़कर॥
एकादशी द्वादशी, बाबा का प्रागट्य।
फाल्गुन में पाएं हम, श्याम का सान्निध्य॥
पारम्परिक लोक-भजन। विभिन्न संस्करणों में पाठ-भेद हो सकता है।
भजन का मर्म
"आया फागुण आया" — यह एक स्वागत-गीत है, जो फाल्गुन माह के आगमन को व्यक्तिगत और सामूहिक उत्सव बना देता है। फाल्गुन = खाटू मेला + होली + प्रागट्य पर्व — एक तीन-गुना उत्सव।
भजन के पदों में मेले की तैयारी का चित्रण है — रींगस से खाटू तक १८ किमी की पैदल निशान यात्रा, होली के रंग, बाबा के दरबार में उमड़ती भीड़।
यह भजन विशेष रूप से फरवरी-मार्च के समय गाया जाता है, जब भक्त अपनी मेले की यात्रा की योजना बनाते हैं। T-Series का संस्करण इसे लाखों श्रोताओं तक पहुँचा चुका है।
गायन-अवसर
फाल्गुन मेला तैयारी, होली पूर्व-संध्या, फरवरी-मार्च के सत्संग, मेले की निशान यात्रा — सब उत्सवी अवसरों पर।
प्रसिद्ध गायक
लखबीर सिंह लक्खा (T-Series Bhakti Sagar) — अधिकारिक होली Special संस्करण।
- बने बर्बरीक खाटू श्याम
बर्बरीक से खाटू श्याम तक — श्रीकृष्ण के वचन और कलियुग में बाबा के प्रागट्य की कथा को भजन रूप में।
- सेठों का सेठ
मारवाड़ी समाज के परम आराध्य — "सेठों का सेठ खाटू नरेश।" बाबा का दानशील स्वरूप जिसने सेठ कोठारी से लेकर लाखों श्रद्धालुओं की झोली भरी।
- तेरी बंसी पुकारे
कृष्ण-श्याम एक हैं — मुरली से हर ध्वनि "राधा" का नाम है। अनुप जलोटा के मधुर शास्त्रीय स्वरों में सजी कालजयी रचना।
- गजब मेरे खाटू वाले
खाटू वाले बाबा के अद्भुत ठाठ — उनके दरबार की महिमा, उनकी कृपा का प्रवाह। कन्हैया मित्तल का सर्वाधिक प्रिय अधिकारिक भजन।
