मारवाड़ी समाज में बाबा खाटू श्याम का एक विशेष नाम है — "सेठों का सेठ।" अर्थात्, सेठों में भी सर्वोच्च, सबसे बड़े दानवीर। यह नाम सेठ अबीरचन्द कोठारी की कथा से जुड़ा है — जिन्होंने बाबा के दर्शन-स्वप्न के बाद अपनी सम्पूर्ण सम्पत्ति लगाकर मन्दिर बनवाया।
भजन का भाव गहरा है — व्यापारी समाज जब अपने आराध्य को "सेठों का सेठ" कहता है, तो वह अपनी समस्त धन-सम्पदा का स्रोत बाबा को मानता है। कन्हैया मित्तल का गायन इस भाव को अधिक स्पष्टता से उभारता है।
भजन सुनें
यह यूट्यूब का एक प्रसिद्ध संस्करण है। बहुत से कलाकारों ने इस भजन को आवाज़ दी है।
ध्रुव पंक्ति
सेठों का सेठ खाटू नरेश है,
दाताओं का दाता खाटू नरेश है॥
झोली भर दे, बेड़ा पार कर दे,
मेरा बाबा सेठों का सेठ है॥
अंतरा · ०१
अबीरचन्द कोठारी पर तेरी कृपा हुई।
सम्पूर्ण मारवाड़ी समाज तेरा भक्त बना॥
जो भी आये दर पे, खाली न लौटे।
तेरे दरबार में सबकी झोली भरी॥
अंतरा · ०२
खाटू नगरी में बैठा है दानवीर।
भक्तों के मनोरथ पूर्ण करता पीर॥
सेठ अमीर हो या गरीब अधीन।
बाबा के दर सब हैं समान, सब हैं प्रवीण॥
पारम्परिक लोक-भजन। विभिन्न संस्करणों में पाठ-भेद हो सकता है।
भजन का मर्म
"सेठों का सेठ" — यह एक विरोधाभासी और गहन उपमा है। व्यापारी जगत में "सेठ" का अर्थ धनी व्यापारी होता है। बाबा को "सेठों का सेठ" कहना यह स्वीकार करना है कि सम्पूर्ण व्यापारिक समृद्धि का स्रोत वही हैं — दानवीर।
भजन के पदों में सेठ कोठारी की कथा का स्मरण है — एक धनी व्यापारी जिसने अपनी पूरी सम्पत्ति बाबा के नाम कर दी, और बाबा ने उसके वंश को अनन्त समृद्धि दी।
यह भजन व्यापारियों, उद्योगपतियों, और समस्त कार्य-शुरुआत के समय गाया जाता है। मारवाड़ी समाज के सत्संगों में यह केन्द्रीय स्थान रखता है।
गायन-अवसर
दिवाली, धनतेरस, नए व्यवसाय का आरम्भ, मारवाड़ी सत्संग — सब जगह जहाँ बाबा का दानशील स्वरूप स्मरण किया जाता है।
प्रसिद्ध गायक
कन्हैया मित्तल का अधिकारिक 4K संस्करण। यह उनका सबसे लोकप्रिय एकल भजनों में से एक है।
- बने बर्बरीक खाटू श्याम
बर्बरीक से खाटू श्याम तक — श्रीकृष्ण के वचन और कलियुग में बाबा के प्रागट्य की कथा को भजन रूप में।
- तेरी बंसी पुकारे
कृष्ण-श्याम एक हैं — मुरली से हर ध्वनि "राधा" का नाम है। अनुप जलोटा के मधुर शास्त्रीय स्वरों में सजी कालजयी रचना।
- आया फागुण आया
फाल्गुन का स्वागत — मेले, होली, और खाटू दर्शन का उमंगी आगमन। लखबीर सिंह लक्खा का होली-स्पेशल गायन।
- गजब मेरे खाटू वाले
खाटू वाले बाबा के अद्भुत ठाठ — उनके दरबार की महिमा, उनकी कृपा का प्रवाह। कन्हैया मित्तल का सर्वाधिक प्रिय अधिकारिक भजन।
