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खाटू श्यामEN
भजन

मेरे हृदय माझे खाटूनयने कृष्णा

‖ श्री खाटू श्याम भजन ‖

मेरे हृदय माझे खाटू, नयने कृष्णा — एक अद्भुत भजन। बंगाली स्वरों में हिन्दी-राजस्थानी भक्ति का मिलन, और दर्शन की वही चिर-पुरातन प्यास। "दे दे दरस दे" — एक ऐसी पुकार जो भक्त की हर साँस में बसी है, जिसमें कलयुग के अवतारी, तीन बाण वाले, हारे के सहारे श्याम बाबा से बस एक बार का बुलावा माँगा गया है।

यह भजन खाटू श्याम भक्ति-परम्परा में एक नया और विशिष्ट प्रयोग है — बंगाली देव-भाषा के मधुर शब्दों ("माझे", "नयने", "जाइबो", "किसेर भावना") को हिन्दी-राजस्थानी श्याम-भक्ति के साथ बुना गया है। बंगाली में भक्ति-गीतों की लम्बी परम्परा है — चैतन्य महाप्रभु से लेकर रामकृष्ण-विवेकानन्द युग तक — और यह भजन उसी सरलता और भाव-विभोरता को खाटू श्याम तक ले आता है।

मूल भाव वही पुरातन है — "हारे का सहारा" बाबा से दर्शन की विनती। पर शब्दों का चयन और स्वरों का प्रवाह नया है। "दे दे दरस दे, श्याम हेला कोरिस ना" का अनुवाद है: "दर्शन दो श्याम, उपेक्षा मत करो।" इस एक पंक्ति में सम्पूर्ण भजन का सार है।

श्रवण

भजन सुनें

यह यूट्यूब का एक प्रसिद्ध संस्करण है। बहुत से कलाकारों ने इस भजन को आवाज़ दी है।

मेरे हृदय माझे खाटू

ध्रुव पंक्ति

दे दे दरस दे, श्याम हेला कोरिस ना॥

खोल दे रे द्वार बाबा, जाइबो खाटू धाम॥

एक बार बुला ले मोहे, जाइबो खाटू धाम॥

दे दे दरस दे, दे दे दरस दे॥

  1. अंतरा · ०१

    कलयुग में अवतारी, आए खाटू के द्वार।

    हारे का सहारा, तू है मेरा श्याम॥

    ओ तेरे नाम से दुनिया तरी जाए रे।

    श्याम जिसका सखा उसका, किसेर भावना॥

    मेरे हृदय माझे खाटू, नयने कृष्णा॥

  2. अंतरा · ०२

    जिसका श्याम सखा है, उसे किसका है डर।

    तीन बाण वाले मेरे श्याम सुंदर॥

    ओ मोरा दिया जले, खाटू के घर घर।

    श्याम जिसका सखा उसका, किसेर भावना॥

    मेरे हृदय माझे खाटू, नयने कृष्णा॥

पारम्परिक लोक-भजन। विभिन्न संस्करणों में पाठ-भेद हो सकता है।

अर्थ

भजन का मर्म

भजन का स्थायी — "मेरे हृदय माझे खाटू, नयने कृष्णा" — एक गहरे आध्यात्मिक सत्य का सरल कथन है: खाटू (बाबा का धाम) मेरे हृदय में बसा है, और नयनों में बसे हैं स्वयं श्रीकृष्ण। यह बर्बरीक-कथा का सूक्ष्म स्मरण भी है — बाबा बर्बरीक ने अपना शीश श्रीकृष्ण को दान दिया, और कलयुग में स्वयं खाटू बने।

पहला पद कलयुग के अवतार-तत्त्व को छूता है — "कलयुग में अवतारी, आए खाटू के द्वार"। बाबा कलयुग के सहारे हैं, क्योंकि उन्होंने स्वयं को 'हारे का सहारा' होने का वर पाया था। "तेरे नाम से दुनिया तरी जाए रे" — केवल नाम-स्मरण से संसार-सागर पार होता है।

दूसरा पद वीरता और निडरता का है — "तीन बाण वाले मेरे श्याम सुंदर"। बर्बरीक के तीन अमोघ बाणों का स्मरण, और "जिसका श्याम सखा है, उसे किसका है डर" — निःशंक भक्ति का घोष। "मोरा दिया जले, खाटू के घर घर" — खाटू के हर घर में दीप जलने का दृश्य, बाबा की लोक-व्याप्ति का प्रतीक।

अंत में "दे दे दरस दे..." पाँच बार दोहराया जाता है — एक ऐसी निरन्तर पुकार जिसमें भक्त अपने आप को बाबा के सम्मुख पूर्ण समर्पित कर देता है। यह भजन सुनकर मन में एक मधुर शान्ति उतरती है — जैसे बाबा का बुलावा सुनाई दे रहा हो।

गायन-अवसर

प्रातः ध्यान, सायं आरती के पहले, और लम्बी यात्रा में चलते समय — विशेषतः जब हृदय में खाटू पहुँचने की लालसा प्रबल हो।

प्रसिद्ध गायक

khatu.in द्वारा निर्मित — चैनल @khatu_in (YouTube)।