सफलाएकादशी
‖ ३ जनवरी २०२७ (रविवार) ‖
पौष कृष्ण एकादशी — "सफला" अर्थात् कार्यों को सफल करने वाली एकादशी। अंग्रेज़ी नववर्ष के आसपास आने वाला यह व्रत वर्ष के आरम्भ को शुभ संकल्प से जोड़ता है।
सफला एकादशी पौष माह के कृष्ण पक्ष में, कड़ाके की सर्दी के दिनों में आती है (अमान्त पंचांग में इसे मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी कहा जाता है)। इसके अधिष्ठाता देव भगवान नारायण हैं। नाम ही इसका फल बताता है — श्रद्धा से रखा गया यह व्रत जीवन के रुके हुए कार्यों को सफल करने वाला माना जाता है।
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लुम्पक की कथा
श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को यह कथा सुनाई थी। राजा महिष्मत का ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक दुराचारी था, इसलिए पिता ने उसे राज्य से निकाल दिया। वन में भूख और ठिठुरती ठण्ड से अचेत लुम्पक एकादशी के दिन भोजन न जुटा सका; उसने गिरे हुए फल इकट्ठे कर भगवान को अर्पित किए और रात भर जागता रहा। अनजाने में ही उसका सफला एकादशी का व्रत पूर्ण हो गया — और उसी पुण्य से उसका जीवन बदल गया तथा उसे फिर से राज्य-सम्मान प्राप्त हुआ।
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अनजाने व्रत का भी फल
इस कथा का सन्देश यही है कि भगवान भाव के भूखे हैं। लुम्पक ने न विधि जानी थी, न संकल्प लिया था — केवल भूखा रहकर फल अर्पित किए और जागरण किया। मान्यता है कि श्रद्धा से रखा गया सफला एकादशी का व्रत और रात्रि-जागरण अनेक वर्षों की तपस्या के समान पुण्य देता है। इसीलिए इस दिन भगवान को ऋतु-फल अर्पित करने की परम्परा है।
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हारे का सहारा
श्री खाटू श्याम जी श्रीकृष्ण के ही कलियुगी रूप हैं, और एकादशी विष्णु-कृष्ण की प्रिय तिथि है। लुम्पक की कथा "हारे का सहारा" के भाव से मेल खाती है — जिसे पिता और समाज ने त्याग दिया, उसे भी भगवान ने अपनाया। जीवन में हार चुके भक्त इसी भरोसे से बाबा के दरबार में आते हैं।
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दशमी की रात्रि से सात्त्विक आहार और संयम।
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एकादशी प्रातः स्नान कर भगवान नारायण / श्याम बाबा का पूजन और व्रत-संकल्प।
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भगवान को ऋतु-फल, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करें।
- ०४
दिनभर निराहार अथवा फलाहार व्रत; सामर्थ्य हो तो रात्रि-जागरण और भजन-कीर्तन।
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द्वादशी प्रातः स्नान-पूजन कर, किसी जरूरतमन्द को भोजन अथवा गर्म वस्त्र का दान देकर पारण।
सफला एकादशी — सामान्य प्रश्न
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सफला एकादशी का क्या अर्थ है?
"सफला" का अर्थ है — सफलता देने वाली। मान्यता है कि श्रद्धा से यह व्रत रखने पर जीवन के कार्य सफल होते हैं और पापों का क्षय होता है। इसके अधिष्ठाता देव भगवान नारायण हैं।
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सफला एकादशी की कथा क्या है?
राजा महिष्मत ने अपने दुराचारी पुत्र लुम्पक को राज्य से निकाल दिया था। वन में भूखे-ठिठुरते लुम्पक ने एकादशी के दिन गिरे हुए फल भगवान को अर्पित किए और रात भर जागता रहा। अनजाने में हुए इसी व्रत के पुण्य से उसका जीवन बदल गया और उसे फिर से राज्य-सम्मान मिला।
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सफला एकादशी पौष में है या मार्गशीर्ष में?
दोनों ही सही हैं — अन्तर केवल पंचांग की गणना का है। उत्तर भारत के पूर्णिमान्त पंचांग में यह पौष कृष्ण एकादशी है, जबकि अमान्त पंचांग में इसी तिथि को मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी कहा जाता है। तिथि एक ही है।
