एकादशीकैलेंडर
‖ २४ एकादशियाँ · प्रति वर्ष ‖
हिन्दू पंचांग में प्रत्येक माह के दोनों पक्षों — कृष्ण और शुक्ल — में एक-एक एकादशी आती है। फाल्गुन शुक्ल एकादशी (आमलकी) श्री खाटू श्याम जी के प्रागट्य की तिथि है।
अगली एकादशी
२५ जून २०२६ (गुरुवार)
निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ · शुक्ल पक्ष
और आगे की एकादशियाँ
- १० जुलाई २०२६ (शुक्रवार)योगिनी
- २५ जुलाई २०२६ (शनिवार)देवशयनी
- ९ अगस्त २०२६ (रविवार)कामिका
- २३ अगस्त २०२६ (रविवार)श्रावण पुत्रदा
- ७ सितम्बर २०२६ (सोमवार)अजा
- २२ सितम्बर २०२६ (मंगलवार)परिवर्तिनी
- ६ अक्टूबर २०२६ (मंगलवार)इन्दिरा
- २२ अक्टूबर २०२६ (गुरुवार)पापांकुशा
- ५ नवम्बर २०२६ (गुरुवार)रमा
- २० नवम्बर २०२६ (शुक्रवार)देवोत्थानी
- ४ दिसम्बर २०२६ (शुक्रवार)उत्पन्ना
स्रोत: Drik Panchang (स्मार्त परम्परा)। तिथियाँ हर वर्ष पंचांग के अनुसार बदलती हैं — विशेष तिथि के लिए स्थानीय पंचांग का परामर्श अवश्य लें।
एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, और श्री खाटू श्याम जी श्रीकृष्ण के ही कलियुगी रूप माने जाते हैं। प्रत्येक एकादशी का अपना नाम, कथा और फल है — पर सबमें फाल्गुन शुक्ल एकादशी विशेष है, क्योंकि यही बाबा के प्रागट्य की तिथि है।
खाटू-विशेष तिथि
फाल्गुन शुक्ल एकादशी — आमलकी
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी (आमलकी) श्री खाटू श्याम जी के प्रागट्य की तिथि मानी जाती है। इसी दिन रींगस से खाटू तक लाखों भक्त निशान यात्रा करते हैं और बाबा के दर्शन का पावन अवसर पाते हैं।
२०२७ में यह तिथि १८ मार्च २०२७ को आ रही है। इसी से अगली द्वादशी तक "लक्खी मेला" आयोजित होता है।
२४ एकादशियाँ — माह-वार
चैत्र से फाल्गुन तक — १२ हिन्दू महीनों के दोनों पक्षों की एकादशियाँ।
- ०१
चैत्र · कृष्ण
पापमोचनी
पापों का मोचन — आत्म-शुद्धि के लिए विशेष।
- ०२
चैत्र · शुक्ल
कामदा
सर्व मनोरथ-पूर्ति — कामनाओं की सिद्धि।
- ०३
वैशाख · कृष्ण
वरुथिनी
दुर्भाग्य से रक्षा और शुभ फल की प्राप्ति।
- ०४
वैशाख · शुक्ल
मोहिनी
मोह-निवृत्ति, चित्त की निर्मलता।
- ०५
ज्येष्ठ · कृष्ण
अपरा
अपार पुण्य की प्राप्ति।
- ०६
ज्येष्ठ · शुक्ल
निर्जला
सबसे कठिन व्रत — जल भी ग्रहण नहीं किया जाता; एक से सर्व एकादशी का फल।
- ०७
आषाढ़ · कृष्ण
योगिनी
योग-शक्ति और शाप-निवृत्ति।
- ०८
आषाढ़ · शुक्ल
देवशयनी
भगवान विष्णु का शयन-आरम्भ; चातुर्मास का प्रारम्भ।
- ०९
श्रावण · कृष्ण
कामिका
पाप-नाश और मनोरथ-सिद्धि।
- १०
श्रावण · शुक्ल
पुत्रदा
सन्तान-प्राप्ति की कामना।
- ११
भाद्रपद · कृष्ण
अजा
राज्य-प्राप्ति, सर्व-कष्ट निवारण।
- १२
भाद्रपद · शुक्ल
परिवर्तिनी
भगवान विष्णु करवट परिवर्तन — शयनी का मध्य।
- १३
अश्विन · कृष्ण
इन्दिरा
पितरों को मोक्ष-प्राप्ति।
- १४
अश्विन · शुक्ल
पापांकुशा
पापों के अंकुश से मुक्ति।
- १५
कार्तिक · कृष्ण
रमा
लक्ष्मीप्राप्ति और सौभाग्य।
- १६
कार्तिक · शुक्ल
देवोत्थानी
भगवान विष्णु का जागरण; तुलसी-विवाह; चातुर्मास समापन।
- १७
मार्गशीर्ष · कृष्ण
उत्पन्ना
एकादशी देवी का प्रागट्य — सम्पूर्ण एकादशियों की जननी।
- १८
मार्गशीर्ष · शुक्ल
मोक्षदा
मोक्ष की प्राप्ति; गीता जयन्ती।
- १९
पौष · कृष्ण
सफला
समस्त कार्यों में सफलता।
- २०
पौष · शुक्ल
पुत्रदा
सन्तान-सुख की कामना (वैकुण्ठ एकादशी भी इसी के समीप)।
- २१
माघ · कृष्ण
षट्तिला
तिल-दान का विशेष महत्व।
- २२
माघ · शुक्ल
जया
भूत-पिशाच योनि से मुक्ति।
- २३
फाल्गुन · कृष्ण
विजया
सर्व कार्य में विजय।
- २४
फाल्गुन · शुक्ल
आमलकी★ खाटू
श्री खाटू श्याम जी के प्रागट्य की तिथि — लक्खी मेले का प्रथम दिन। आँवला वृक्ष की पूजा का विधान।
तिथियाँ हर वर्ष पंचांग के अनुसार बदलती हैं। विशेष तिथि के लिए अपने स्थानीय पंचांग का परामर्श अवश्य लें।
एकादशी व्रत कैसे करें
- ०१
दशमी की संध्या से ही सात्विक भोजन और मन-शुद्धि का संकल्प लें।
- ०२
एकादशी प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और संकल्प लें।
- ०३
सम्पूर्ण दिन फलाहार पर रहें — चावल, अन्न, दलहन वर्जित।
- ०४
भगवान विष्णु, श्याम बाबा या अपने इष्ट का स्मरण-पाठ करें।
- ०५
रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करें — यह व्रत का प्रमुख अंग है।
- ०६
द्वादशी प्रातः स्नान-दान-पारण कर के व्रत समाप्त करें।
एकादशी — सामान्य प्रश्न
- ०१
एक वर्ष में कितनी एकादशी होती हैं?
सामान्य वर्ष में २४ एकादशियाँ आती हैं — प्रत्येक हिन्दू माह के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों में एक-एक। जिस वर्ष अधिक मास (मलमास) आता है, उस वर्ष दो अतिरिक्त एकादशियाँ जुड़कर कुल २६ हो जाती हैं। प्रत्येक एकादशी का अपना नाम, कथा और फल है।
- ०२
खाटू श्याम से जुड़ी एकादशी कौन-सी है?
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे आमलकी एकादशी कहते हैं, श्री खाटू श्याम जी के प्रागट्य की तिथि मानी जाती है। इसी दिन से खाटू में लक्खी मेला आरम्भ होता है और रींगस से लाखों भक्त निशान यात्रा करते हैं। वर्ष २०२७ में यह तिथि १८ मार्च को है।
- ०३
एकादशी व्रत में क्या खाया जा सकता है?
एकादशी पर चावल, अन्न और दलहन वर्जित माने जाते हैं। व्रती फलाहार करते हैं — फल, दूध, साबूदाना, सिंघाड़े या कुट्टू के आटे से बने पदार्थ और सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। कुछ भक्त निर्जला अथवा केवल जल पर भी व्रत रखते हैं।
- ०४
सबसे कठिन एकादशी व्रत कौन-सा है?
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी सबसे कठिन मानी जाती है, जिसमें जल भी ग्रहण नहीं किया जाता। शास्त्रों के अनुसार अकेले इस एक व्रत को करने से वर्ष की सम्पूर्ण एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त होता है।
- ०५
अगली एकादशी कब है यह कैसे पता करें?
इस पृष्ठ पर सबसे ऊपर "अगली एकादशी" कार्ड दिया गया है, जो स्मार्त परम्परा (Drik Panchang) के अनुसार आगामी एकादशी की तिथि और नाम दिखाता है। चूँकि तिथियाँ चन्द्र-गणना पर आधारित होती हैं, सटीक व्रत-तिथि के लिए अपने स्थानीय पंचांग का परामर्श भी अवश्य लें।
