मोक्षदाएकादशी
‖ २० दिसम्बर २०२६ (रविवार) ‖
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी — "मोक्ष देने वाली" तिथि, जो गीता जयन्ती भी है। इसी दिन कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता सुनाई थी।
मोक्षदा एकादशी वर्ष की उन गिनी-चुनी तिथियों में है जहाँ व्रत और शास्त्र एक साथ आते हैं। एक ओर यह जन्म-मरण के बन्धन से मुक्ति देने वाली एकादशी है, दूसरी ओर यही गीता जयन्ती है — वह दिन जब कुरुक्षेत्र के मैदान में गीता का उपदेश हुआ।
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मोक्ष देने वाली एकादशी
"मोक्षदा" का अर्थ ही है — मोक्ष देने वाली। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक रखा गया यह व्रत व्रती के साथ-साथ उसके पितरों को भी जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की ओर ले जाता है। इसीलिए अनेक भक्त इस दिन का व्रत अपने पूर्वजों के निमित्त भी संकल्पित करते हैं।
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गीता जयन्ती
इसी तिथि को कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में, दोनों सेनाओं के बीच खड़े रथ पर, श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। इसीलिए यह दिन गीता जयन्ती के रूप में मनाया जाता है — गीता-पाठ, विशेषकर द्वितीय और अष्टादश अध्याय का पाठ, इस दिन का मुख्य कर्म है।
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वही कुरुक्षेत्र, वही युद्ध
श्याम-भक्तों के लिए इस तिथि का एक विशेष अर्थ है। जिस कुरुक्षेत्र के मैदान पर गीता कही गई, उसी युद्ध को बर्बरीक का शीश एक ऊँचे टीले से आदि से अन्त तक देखता रहा — यह वही महाभारत है जिससे बाबा श्याम की कथा आरम्भ होती है। जिस श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता सुनाई, उन्हीं ने बर्बरीक को "श्याम" नाम और कलियुग में पूजित होने का वरदान दिया।
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दशमी की रात्रि से सात्त्विक आहार और संयम।
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एकादशी प्रातः स्नान कर श्रीकृष्ण/श्याम बाबा का पूजन और व्रत-संकल्प।
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श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ — सम्पूर्ण न हो सके तो द्वितीय अथवा अष्टादश अध्याय का पाठ करें।
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दिनभर निराहार अथवा फलाहार व्रत; पितरों के निमित्त संकल्प भी इसी दिन किया जाता है।
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द्वादशी प्रातः स्नान-पूजन कर पारण; गीता अथवा अन्न का दान शुभ।
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मोक्षदा एकादशी — सामान्य प्रश्न
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मोक्षदा एकादशी और गीता जयन्ती क्या एक ही दिन हैं?
हाँ। मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है, और इसी दिन कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता सुनाई थी — इसलिए यही तिथि गीता जयन्ती भी है।
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मोक्षदा एकादशी का व्रत क्यों रखा जाता है?
"मोक्षदा" अर्थात् मोक्ष देने वाली। यह व्रत जन्म-मरण के बन्धन से मुक्ति के लिए रखा जाता है, और मान्यता है कि इसका पुण्य पितरों को अर्पित करने से उन्हें भी सद्गति प्राप्त होती है।
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इस दिन गीता का कौन-सा अध्याय पढ़ना चाहिए?
सम्भव हो तो सम्पूर्ण गीता का पाठ करें। समय कम हो तो द्वितीय अध्याय (सांख्य योग) अथवा अष्टादश अध्याय (मोक्ष संन्यास योग) का पाठ इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है।
