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खाटू श्याम
उत्सव · एकादशी

उत्पन्नाएकादशी

‖ ४ दिसम्बर २०२६ (शुक्रवार) ‖

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी — वह तिथि जिस दिन स्वयं एकादशी देवी प्रकट हुईं। समस्त एकादशी-व्रत परम्परा का आरम्भ यहीं से माना जाता है।

वर्ष की चौबीस एकादशियों में यह अकेली ऐसी है जो किसी देवता की नहीं, स्वयं एकादशी तिथि की जन्म-कथा कहती है। जो भक्त एकादशी व्रत आरम्भ करना चाहते हैं, उनके लिए परम्परा में यही तिथि सर्वोत्तम आरम्भ-बिन्दु मानी जाती है।

महत्व
  1. ०१

    एकादशी देवी का प्रागट्य

    पुराण-कथा के अनुसार मुर नामक दैत्य से युद्ध करते हुए भगवान विष्णु बद्रिकाश्रम की गुफा में विश्राम हेतु गए। मुर ने सोए हुए विष्णु पर प्रहार करना चाहा, तभी उनके तेज से एक देवी प्रकट हुईं और उन्होंने मुर का वध किया। विष्णु ने प्रसन्न होकर उन्हें "एकादशी" नाम दिया और वरदान दिया कि यह तिथि उन्हें सर्वाधिक प्रिय रहेगी।

  2. ०२

    सभी एकादशियों की जननी

    यही वह तिथि है जहाँ से एकादशी-व्रत की परम्परा आरम्भ हुई — इसीलिए इसे समस्त एकादशियों की जननी कहा जाता है। जो भक्त वर्ष भर एकादशी रखने का संकल्प लेना चाहते हैं, वे प्रायः उत्पन्ना एकादशी से ही आरम्भ करते हैं।

  3. ०३

    जन्मोत्सव के बाद का संकल्प

    श्याम-भक्तों के लिए उत्पन्ना एकादशी का स्थान विशेष है — यह देवउठनी एकादशी, अर्थात् बाबा के प्रागट्य-दिवस और कार्तिक मेले के कुछ ही सप्ताह बाद आती है। मेले से लौटा भक्त इसी तिथि से वर्ष भर की एकादशी का संकल्प लेकर अपनी भक्ति को नियम में बाँधता है।

व्रत विधि
  1. ०१

    दशमी की रात्रि से सात्त्विक आहार, संयम और ब्रह्मचर्य।

  2. ०२

    एकादशी प्रातः स्नान कर विष्णु और श्याम बाबा का पूजन; वर्ष भर एकादशी रखने का संकल्प लेना हो तो आज लें।

  3. ०३

    तुलसी दल अर्पण और विष्णु-सहस्रनाम अथवा श्याम-स्तवन का पाठ।

  4. ०४

    दिनभर निराहार अथवा फलाहार व्रत, सामर्थ्य अनुसार; रात्रि जागरण शुभ माना जाता है।

  5. ०५

    द्वादशी प्रातः स्नान-पूजन कर ब्राह्मण अथवा किसी जरूरतमन्द को भोजन कराकर पारण।

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उत्पन्ना एकादशी — सामान्य प्रश्न

  1. ०१

    उत्पन्ना एकादशी का क्या महत्व है?

    इसी तिथि को स्वयं एकादशी देवी भगवान विष्णु के तेज से प्रकट हुई थीं और उन्होंने मुर दैत्य का वध किया था। यहीं से एकादशी-व्रत की परम्परा आरम्भ मानी जाती है, इसलिए इसे सभी एकादशियों की जननी कहा जाता है।

  2. ०२

    क्या एकादशी व्रत उत्पन्ना से ही आरम्भ करना चाहिए?

    परम्परा में यही तिथि सर्वोत्तम आरम्भ-बिन्दु मानी जाती है, क्योंकि एकादशी व्रत की परम्परा यहीं से आरम्भ हुई। किन्तु यह अनिवार्य नियम नहीं — श्रद्धा हो तो किसी भी एकादशी से आरम्भ किया जा सकता है।

  3. ०३

    उत्पन्ना एकादशी कब आती है?

    उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में आती है — देवउठनी एकादशी और खाटू के कार्तिक मेले के कुछ सप्ताह बाद। अगली तिथि इस पृष्ठ के शीर्ष पर दी गई है।