श्रावण पुत्रदाएकादशी
‖ २३ अगस्त २०२६ (रविवार) ‖
श्रावण शुक्ल एकादशी — "पुत्रदा" अर्थात् सन्तान-सुख देने वाली एकादशी। सन्तान-प्राप्ति और सन्तान के कल्याण की कामना से रखा जाने वाला यह व्रत श्रावण मास की पवित्रता में और भी फलदायी माना जाता है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में आती है — चातुर्मास और सावन की भक्ति-ऋतु के मध्य। "पुत्रदा" नाम ही इसका फल कहता है: निःसन्तान दम्पति सन्तान-प्राप्ति की कामना से, और माता-पिता अपनी सन्तान के दीर्घायु व कल्याण की प्रार्थना से यह व्रत रखते हैं। श्याम-भक्तों के लिए यह बाबा के चरणों में सन्तान का सुख माँगने की विशेष तिथि है।
- ०१
सन्तान-सुख देने वाली एकादशी
पुराणों के अनुसार जो दम्पति सन्तान-सुख से वंचित हों, वे श्रद्धापूर्वक श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु की कृपा से सन्तान-प्राप्ति का वरदान पाते हैं। "पुत्रदा" का अर्थ ही है — सन्तान (पुत्र) देने वाली। जिनके सन्तान है, वे उसके दीर्घायु और कल्याण की कामना से यह व्रत रखते हैं।
- ०२
श्रावण मास की महिमा
सावन भगवान की भक्ति का सर्वश्रेष्ठ मास है — कीर्तन, झूलों और सेवा की ऋतु। चातुर्मास के इस पवित्र काल में आने वाली पुत्रदा एकादशी का व्रत, तप और संयम का फल कई गुना बढ़ जाता है। तुलसी-पूजन और विष्णु-सहस्रनाम का पाठ इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है।
- ०३
श्याम बाबा और सन्तान-कामना
श्री खाटू श्याम जी श्रीकृष्ण के ही कलियुगी रूप हैं और एकादशी विष्णु-कृष्ण की प्रिय तिथि है। "हारे का सहारा" के दरबार में निःसन्तान भक्त सच्ची श्रद्धा से मनोकामना रखते हैं — श्रावण पुत्रदा एकादशी पर बाबा का स्मरण करते हुए व्रत रखना सन्तान-सुख की प्रार्थना का सुन्दर अवसर है।
- ०१
दशमी की रात्रि से सात्त्विक आहार और संयम।
- ०२
एकादशी प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु/श्याम बाबा का तुलसी-पत्र, पुष्प व पंचामृत से पूजन और व्रत का संकल्प।
- ०३
दिनभर फलाहार व्रत — विष्णु-सहस्रनाम, श्याम नाम-जप और भजन-कीर्तन।
- ०४
सन्तान के कल्याण/प्राप्ति की कामना से भगवान के समक्ष प्रार्थना और दीप-दान।
- ०५
द्वादशी प्रातः पारण और यथाशक्ति अन्न-दान।
श्रावण पुत्रदा एकादशी — सामान्य प्रश्न
- ०१
श्रावण पुत्रदा एकादशी कब है?
श्रावण पुत्रदा एकादशी श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में आती है — इस पृष्ठ के ऊपर अगली तिथि दी गई है। यह वर्ष में आने वाली दो पुत्रदा एकादशियों में से एक है (दूसरी पौष माह में आती है)।
- ०२
पुत्रदा एकादशी का व्रत क्यों रखा जाता है?
पुत्रदा एकादशी सन्तान-सुख की कामना से रखी जाती है — निःसन्तान दम्पति सन्तान-प्राप्ति के लिए, और माता-पिता अपनी सन्तान के दीर्घायु व कल्याण के लिए यह व्रत रखते हैं। "पुत्रदा" का अर्थ ही है सन्तान देने वाली।
- ०३
श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत कैसे रखें?
दशमी की रात्रि से संयम आरम्भ कर एकादशी को स्नान-पूजन के बाद फलाहार व्रत रखा जाता है। दिनभर विष्णु/श्याम नाम-जप, तुलसी-पूजन और भजन-कीर्तन कर सन्तान-कल्याण की प्रार्थना की जाती है, और द्वादशी प्रातः पारण किया जाता है।
