कामिकाएकादशी
‖ ९ अगस्त २०२६ (रविवार) ‖
श्रावण कृष्ण एकादशी — चातुर्मास की पहली और श्रावण मास की एकादशी, जब भगवान विष्णु का तुलसी-पत्र से पूजन गंगा-स्नान के तुल्य फल देता है।
कामिका एकादशी श्रावण माह के कृष्ण पक्ष में आती है — चातुर्मास आरम्भ होने के बाद पहली एकादशी। श्रावण का पवित्र मास, तुलसी-पूजन का विशेष विधान और दीप-दान की महिमा — तीनों इस तिथि को श्याम-भक्तों के लिए विशेष बनाते हैं।
- ०१
तुलसी-पत्र पूजन की महिमा
शास्त्र कहते हैं कि कामिका एकादशी पर तुलसी-पत्र से भगवान विष्णु का पूजन स्वर्ण, रत्न और तीर्थ-स्नान के दान से भी बढ़कर फल देता है। तुलसी-दल अर्पण करने वाले भक्त के जन्मों के पाप क्षीण होते हैं।
- ०२
दीप-दान का विधान
कामिका एकादशी की रात्रि भगवान के समक्ष घी या तिल के तेल का दीपक जलाने का विशेष विधान है — पुराण कहते हैं कि ऐसा दीप-दान करने वाले के पितर भी तृप्त होते हैं और स्वयं भक्त को अक्षय पुण्य मिलता है।
- ०३
श्रावण में श्याम-भक्ति
श्रावण खाटू श्याम मन्दिर में भक्ति-रस का मास है — काँवड़, कीर्तन और झूलों की ऋतु। चातुर्मास की इस पहली एकादशी पर बाबा का स्मरण करते हुए व्रत रखना श्रावण-साधना का सुन्दर आरम्भ माना जाता है।
- ०१
दशमी की रात्रि से सात्त्विक आहार और संयम।
- ०२
एकादशी प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु/श्याम बाबा का तुलसी-पत्र, पुष्प व पंचामृत से पूजन।
- ०३
दिनभर फलाहार व्रत — विष्णु/श्याम नाम-जप और भजन-कीर्तन में दिन बिताएँ।
- ०४
सन्ध्या को भगवान के समक्ष घी अथवा तिल के तेल का दीपक जलाएँ (दीप-दान)।
- ०५
द्वादशी प्रातः पारण और यथाशक्ति अन्न-दान।
कामिका एकादशी — सामान्य प्रश्न
- ०१
कामिका एकादशी का क्या महत्व है?
कामिका एकादशी श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी है — चातुर्मास की पहली एकादशी। इस दिन तुलसी-पत्र से भगवान विष्णु का पूजन तीर्थ-स्नान और स्वर्ण-दान से भी बढ़कर फलदायी माना गया है।
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कामिका एकादशी पर दीपक क्यों जलाते हैं?
पुराणों के अनुसार कामिका एकादशी की रात्रि भगवान के समक्ष घी या तिल के तेल का दीपक जलाने (दीप-दान) से पितर तृप्त होते हैं और भक्त को अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।
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कामिका एकादशी कब आती है?
कामिका एकादशी श्रावण माह के कृष्ण पक्ष में आती है — देवशयनी एकादशी (चातुर्मास आरम्भ) के बाद पहली एकादशी।
