खाटू मेंहोली
‖ फाग · फूलों की होली · मेले का समापन ‖
फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन और अगले दिन धूलिवन्दन — खाटू में होली का स्वरूप अद्वितीय है। फूलों, गुलाल और पारम्परिक फाग गीतों से सजी बाबा की होली।
होली का पर्व फाल्गुन मेले के समापन के साथ आता है — दो उत्सवों का संगम। खाटू में यह पर्व रंगों से अधिक भक्ति, फूलों और फाग गीतों का स्वरूप लिए है।
होली २०२७
२२ मार्च २०२७
सोमवार
फाल्गुन पूर्णिमा
होलिका दहन
फाल्गुन पूर्णिमा की सायंकाल होलिका दहन के साथ होली का आरम्भ होता है। मन्दिर के निकट और सम्पूर्ण खाटू ग्राम में पारम्परिक होलिका जलाई जाती है — पुरानी संवत्सर की समाप्ति और नवीनता का स्वागत।
२३ मार्च २०२७
मंगलवार
चैत्र कृष्ण प्रतिपदा
धूलिवन्दन और रंगपर्व
धूलिवन्दन के दिन भक्त बाबा के दर्शन करते हुए परस्पर गुलाल और रंग लगाते हैं। मन्दिर के प्रांगण में फूलों और गुलाल की वर्षा होती है। फाल्गुन मेला भी इसी दिन समाप्ति की ओर अग्रसर होता है।
खाटू-विशेष होली
- ०१
फूलों की होली — पारम्परिक स्वरूप
खाटू में होली का सबसे विशेष रूप है फूलों की होली। गुलाब, गेंदा, टेसू (पलाश) के पुष्पों की वर्षा बाबा के दर्शन के समय की जाती है। यह कोमल, सुगन्धित और रंगों से अधिक भक्ति-भरा अनुभव देता है।
- ०२
फाग — होली के पारम्परिक गीत
फाल्गुन माह में "फाग" गाने की परम्परा है — श्रीकृष्ण और श्याम बाबा से सम्बन्धित होली के लोक-गीत, मारवाड़ी और राजस्थानी रचनाएँ। मेले के समय कीर्तन-मण्डलियाँ रात्रि भर फाग गाती हैं।
- ०३
फाल्गुन मेले के साथ संयोग
फाल्गुन शुक्ल एकादशी से होली तक — पूरा फाल्गुन शुक्ल पक्ष — खाटू में सम्पूर्ण भक्ति-वातावरण रहता है। मेला होली के साथ ही समाप्त होता है, जो भक्ति और आनन्द का अद्भुत संगम है।
- ०४
गुलाल अर्पण और बाबा का श्रृंगार
मन्दिर में बाबा की प्रतिमा का होली पर विशेष श्रृंगार होता है — गुलाबी, केसरिया और हरे रंगों के वस्त्र, फूलों की मालाएँ। भक्तगण बाबा के चरणों में गुलाल अर्पित करते हैं।
होली पर ध्यान देने योग्य बातें
- ०१
सात्विक रंग और प्राकृतिक गुलाल
मन्दिर परिसर में सिन्थेटिक या रासायनिक रंगों का उपयोग न करें। केवल प्राकृतिक गुलाल, फूलों की पंखुड़ियाँ या हल्दी-कुमकुम का प्रयोग करें — यह मन्दिर की मर्यादा का सम्मान है।
- ०२
मेले से होली तक — अग्रिम योजना
फाल्गुन मेले के तुरन्त बाद होली आती है। यदि दोनों उत्सवों का अनुभव लेना है, तो ठहरने की व्यवस्था एक सप्ताह की कर लें। होली के दिन भीड़ अपेक्षाकृत कम होती है।
- ०३
पानी और सुरक्षा
पानी की होली से बचें — विशेषतः वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और स्वास्थ्य-समस्या वाले व्यक्तियों के लिए। पर्याप्त जल पीते रहें और दोपहर की धूप से बचें।
‖ श्याम संग खेलूँ होली ‖
फाग गाते हुए, फूल चढ़ाते हुए, बाबा के संग होली का आनन्द।
