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खाटू श्याम
उत्सव · एकादशी

आमलकीएकादशी

‖ १८ मार्च २०२७ (गुरुवार) ‖

फाल्गुन शुक्ल एकादशी — खाटू श्याम जी की सबसे बड़ी एकादशी। यही फाल्गुन मेले का मुख्य दिन है, जब लाखों भक्त निशान लिए बाबा के दरबार पहुँचते हैं। आँवला-पूजन की यह तिथि होली से ठीक पहले आती है।

आमलकी एकादशी फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आती है — होली से चार दिन पहले। सम्पूर्ण भारत में यह आँवला-वृक्ष पूजन की तिथि है, पर खाटू में इसका स्थान अद्वितीय है: यही श्याम बाबा के फाल्गुन मेले का शिखर-दिवस है।

महत्व
  1. ०१

    फाल्गुन मेले का मुख्य दिन

    खाटू श्याम मन्दिर का विश्व-प्रसिद्ध फाल्गुन मेला फाल्गुन शुक्ल षष्ठी से द्वादशी तक चलता है, और आमलकी एकादशी इसका शिखर है। इस दिन रींगस से खाटू तक का 17 किलोमीटर मार्ग निशानधारी पदयात्रियों से भर जाता है और बाबा का दरबार रातभर खुला रहता है।

  2. ०२

    आँवला-पूजन की तिथि

    पुराणों में आमलकी (आँवला) वृक्ष को भगवान विष्णु का प्रिय और उनके आँसुओं से उत्पन्न बताया गया है। इस एकादशी को आँवले के वृक्ष के नीचे भगवान का पूजन और परिक्रमा का विधान है — आँवले का दान व सेवन भी पुण्यकारी माना जाता है।

  3. ०३

    निशान और श्याम-भक्ति

    फाल्गुन की इस एकादशी पर भक्त बाबा को निशान (ध्वजा) अर्पित करते हैं — मनोकामना पूर्ति और आभार का प्रतीक। "हारे का सहारा" के दरबार में यह अर्पण पैदल यात्रा करके करना श्याम-भक्ति की सबसे जीवन्त परम्परा है।

व्रत विधि
  1. ०१

    दशमी की रात्रि से सात्त्विक आहार और संयम।

  2. ०२

    एकादशी प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु/श्याम बाबा का पूजन और व्रत का संकल्प।

  3. ०३

    आँवला वृक्ष के नीचे पूजन-परिक्रमा; आँवला दान व ग्रहण।

  4. ०४

    खाटू में हों तो निशान अर्पण व बाबा के दर्शन; अन्यथा घर पर भजन-कीर्तन और श्याम स्मरण।

  5. ०५

    द्वादशी प्रातः पारण और यथाशक्ति अन्न-दान।

आमलकी एकादशी — सामान्य प्रश्न

  1. ०१

    आमलकी एकादशी का खाटू श्याम से क्या सम्बन्ध है?

    आमलकी एकादशी (फाल्गुन शुक्ल एकादशी) खाटू श्याम जी के फाल्गुन मेले का मुख्य दिन है — लाखों भक्त निशान लिए पदयात्रा कर बाबा के दरबार पहुँचते हैं और मन्दिर रातभर खुला रहता है।

  2. ०२

    आमलकी एकादशी पर आँवले का पूजन क्यों होता है?

    पुराणों में आँवला (आमलकी) वृक्ष भगवान विष्णु को प्रिय और उनके आँसुओं से उत्पन्न बताया गया है। इसीलिए इस एकादशी को आँवले के वृक्ष के नीचे पूजन-परिक्रमा और आँवले के दान-सेवन का विधान है।

  3. ०३

    आमलकी एकादशी कब आती है?

    आमलकी एकादशी फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में, होली से लगभग चार दिन पहले आती है — फाल्गुन मेले के दिनों में।