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खाटू श्याम
उत्सव · एकादशी

देवशयनीएकादशी

‖ २५ जुलाई २०२६ (शनिवार) ‖

आषाढ़ शुक्ल एकादशी — जिस दिन भगवान विष्णु चार मास की योगनिद्रा में जाते हैं और चातुर्मास का आरम्भ होता है। इसे हरिशयनी और पद्मा एकादशी भी कहते हैं।

देवशयनी एकादशी से चातुर्मास आरम्भ होता है — विवाह आदि मांगलिक कार्य चार मास के लिए थम जाते हैं, और भक्ति, जप, सत्संग व सेवा का काल शुरू होता है। श्याम-भक्तों के लिए यह श्रावण के भजन-मय दिनों का द्वार है।

महत्व
  1. ०१

    चातुर्मास का आरम्भ

    इस दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में जाते हैं और देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल) को जागते हैं। यह चार मास चातुर्मास कहलाते हैं — विवाह आदि मांगलिक कार्य रुकते हैं, पर भक्ति और साधना का यही श्रेष्ठ काल है।

  2. ०२

    हरिशयनी — व्रतों के वर्ष का द्वार

    देवशयनी से देवउठनी तक का काल व्रत-पर्वों से भरा है — श्रावण मास, जन्माष्टमी, नवरात्रि, दीपावली। इसीलिए इस एकादशी को व्रतों के वर्ष का द्वार कहा गया है; जो साधक इस दिन संकल्प लेता है, उसका पूरा चातुर्मास साधना-मय बीतता है।

  3. ०३

    खाटू में चातुर्मास

    खाटू श्याम मन्दिर में चातुर्मास भजन-कीर्तन और सत्संग का काल है। देवशयनी एकादशी की सन्ध्या से ही श्रावण की तैयारी का भाव छा जाता है — और चातुर्मास के समापन पर इसी अवधि का उत्कर्ष है कार्तिक मेला, बाबा का प्रागट्य-पर्व।

व्रत विधि
  1. ०१

    दशमी की रात्रि से सात्त्विक आहार और संयम।

  2. ०२

    एकादशी प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु/श्याम बाबा का पीत वस्त्र-पुष्प से पूजन और व्रत का संकल्प।

  3. ०३

    दिनभर फलाहार व्रत, विष्णु सहस्रनाम/श्याम स्मरण और भजन-कीर्तन।

  4. ०४

    चातुर्मास का नियम-संकल्प — कोई एक वस्तु का त्याग या कोई एक नित्य साधना (जप, पाठ, सेवा) चार मास के लिए।

  5. ०५

    द्वादशी प्रातः पारण; यथाशक्ति अन्न-वस्त्र दान।

देवशयनी एकादशी — सामान्य प्रश्न

  1. ०१

    देवशयनी एकादशी पर क्या होता है?

    देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार मास की योगनिद्रा में जाते हैं और चातुर्मास आरम्भ होता है — विवाह आदि मांगलिक कार्य थम जाते हैं और भक्ति-साधना का काल शुरू होता है। वे देवउठनी एकादशी को जागते हैं।

  2. ०२

    चातुर्मास में क्या करना चाहिए?

    चातुर्मास भक्ति का काल है — नित्य जप, पाठ, सत्संग, सेवा और किसी एक वस्तु के त्याग का नियम लिया जाता है। श्रावण, जन्माष्टमी, नवरात्रि जैसे व्रत-पर्व इसी अवधि में आते हैं।

  3. ०३

    देवशयनी एकादशी को और किन नामों से जानते हैं?

    इसे हरिशयनी एकादशी, पद्मा एकादशी और आषाढ़ी एकादशी भी कहते हैं। महाराष्ट्र में इसी दिन पंढरपुर की प्रसिद्ध वारी यात्रा सम्पन्न होती है।