इन्दिराएकादशी
‖ ६ अक्टूबर २०२६ (मंगलवार) ‖
आश्विन कृष्ण एकादशी — पितृ पक्ष के बीच आने वाली वह तिथि जो पितरों की सद्गति के लिए रखी जाती है। वर्ष की एकमात्र एकादशी जिसका फल भक्त अपने पूर्वजों को अर्पित करता है।
इन्दिरा एकादशी श्राद्ध-पक्ष (पितृ पक्ष) के मध्य आती है। शेष सभी एकादशियाँ व्रती के अपने कल्याण के लिए हैं; यह एक ऐसी है जिसका पुण्य भक्त अपने लिए न रखकर पितरों को अर्पित करता है — इसीलिए इसे पितरों की एकादशी कहा जाता है।
- ०१
पितृ पक्ष की एकादशी
यह व्रत पितृ पक्ष में आता है, जब परिवार अपने पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण करते हैं। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखकर उसका फल पितरों को अर्पित करने से वे निम्न योनियों और यमलोक के कष्ट से मुक्त होकर सद्गति पाते हैं।
- ०२
राजा इन्द्रसेन की कथा
माहिष्मती के धर्मपरायण राजा इन्द्रसेन के दरबार में देवर्षि नारद पधारे और बताया कि यमलोक में उन्होंने राजा के पिता को कष्ट भोगते देखा है। नारद जी के परामर्श पर राजा ने इन्दिरा एकादशी का व्रत रखा और उसका पुण्य पिता को अर्पित किया — जिससे उनके पिता को सद्गति प्राप्त हुई।
- ०३
श्याम बाबा और "हारे का सहारा"
बाबा श्याम का सबसे प्रिय नाम है "हारे का सहारा" — जो हार चुका है, जिसका कोई सहारा नहीं बचा, उसका सहारा। पितृ पक्ष में यही भाव सबसे गहरा उतरता है: जो अब स्वयं कुछ नहीं कर सकते, उनके लिए जीवित सन्तान का व्रत ही सहारा बनता है। श्याम-भक्त इस दिन बाबा के समक्ष अपने पितरों के निमित्त दीप जलाते हैं।
- ०१
दशमी को श्राद्ध-विधान अनुसार पितरों का स्मरण और सात्त्विक आहार।
- ०२
एकादशी प्रातः स्नान कर व्रत-संकल्प, तत्पश्चात् विष्णु-पूजन और पितरों के निमित्त तर्पण।
- ०३
दिनभर निराहार या फलाहार व्रत — सामर्थ्य अनुसार।
- ०४
ब्राह्मण-भोजन, अन्न-दान और गौ-ग्रास — पितरों के निमित्त दान इस दिन का मुख्य कर्म है।
- ०५
द्वादशी प्रातः पारण; व्रत का पुण्य संकल्पपूर्वक पितरों को अर्पित करें।
उपयोगीश्याम बाबा का लॉकेट / कवचश्याम बाबा की प्रतिमा / मूर्तिश्याम चालीसा व आरती पुस्तकपूजन सामग्री किट
सहबद्ध लिंक — खरीद पर हमें थोड़ा कमीशन मिल सकता है, आपको कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं।
इन्दिरा एकादशी — सामान्य प्रश्न
- ०१
इन्दिरा एकादशी का व्रत क्यों रखा जाता है?
यह व्रत पितरों की सद्गति के लिए रखा जाता है। पितृ पक्ष में आने वाली इस एकादशी का पुण्य भक्त स्वयं न रखकर अपने पूर्वजों को अर्पित करता है, जिससे मान्यता अनुसार वे यमलोक और निम्न योनियों के कष्ट से मुक्त होते हैं।
- ०२
इन्दिरा एकादशी की कथा क्या है?
माहिष्मती के राजा इन्द्रसेन को देवर्षि नारद ने बताया कि उनके पिता यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं। नारद जी के परामर्श पर राजा ने इन्दिरा एकादशी का व्रत रखकर उसका फल पिता को अर्पित किया, और उन्हें सद्गति प्राप्त हुई।
- ०३
क्या यह व्रत केवल पितरों के लिए ही है?
इसका मुख्य भाव पितरों की सद्गति है, किन्तु व्रती को भी विष्णु-कृपा और पाप-नाश का फल प्राप्त होता है। पितृ पक्ष में आने के कारण इसका पितृ-सम्बन्धी महत्व सर्वाधिक माना जाता है।
